दिन-ब-दिन बढ़ते जलसंकट को लेकर अभी तक समाज और सरकार नहीं चेते हैं। तालाब, कुएं न जाने कहां गायब हो गए। कोई भी विभाग जानकारी नहीं दे पा रहा है। नदी पर अतिक्रमण का जीता-जागता उदाहरण कलियासोत सबके सामने है। लगातार गिरते भू-जल जलस्तर से चिंतित वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और समाजसेवी चेताते रहे हैं, लेकिन सरकारों ने भूजल को रीचार्ज करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जलस्रोतों को बचाने की दिशा में कोई प्रभावशाली व्यवस्था नहीं की। खनन माफिया और कंस्ट्रक्शन कान्ट्रेक्टर्स मनमाने तरह से इन स्रोतों का दोहन कर रहे हैं, उन्हें नष्ट कर रहे हैं।