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यहां मिली है वर्षों पुरानी बावड़ी, पत्थरों पर लिखी है प्राचीन भाषा

अच्छी खबर : इतिहास के राज भी छिपे हैं बावड़ी में, शहरभर के कुएं-बावडिय़ों को संवारने की जरूरत

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Anwar Khan

Jun 12, 2016

archaeology survey of india

archaeology survey of india

भोपाल। भोपाल के उपनगर कोलार में अमरनाथ कॉलोनी से आगे नदी के पास एक बहुत पुरानी बावड़ी मिली है। इसके बारे में लोग बहुत ज्यादा नहीं जानते, लेकिन इतना जरूर बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक इसमें पानी था। इस बावड़ी पर बनी घड़ेनुमा पत्थर की एक आकृति को न जाने किसने ले जाकर कलियासोत नदी की धार में फेंका है। इसपर किसी भाषा में कुछ लिखा है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बावड़ी सैकड़ों वर्ष पुरानी है।

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बढ़ रहा जलसंकट, कोई भी चेता नहीं
दिन-ब-दिन बढ़ते जलसंकट को लेकर अभी तक समाज और सरकार नहीं चेते हैं। तालाब, कुएं न जाने कहां गायब हो गए। कोई भी विभाग जानकारी नहीं दे पा रहा है। नदी पर अतिक्रमण का जीता-जागता उदाहरण कलियासोत सबके सामने है। लगातार गिरते भू-जल जलस्तर से चिंतित वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और समाजसेवी चेताते रहे हैं, लेकिन सरकारों ने भूजल को रीचार्ज करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जलस्रोतों को बचाने की दिशा में कोई प्रभावशाली व्यवस्था नहीं की। खनन माफिया और कंस्ट्रक्शन कान्ट्रेक्टर्स मनमाने तरह से इन स्रोतों का दोहन कर रहे हैं, उन्हें नष्ट कर रहे हैं।


संरक्षण की पहल करेंगे
इस बावड़ी में पहले पानी था। हम लोग यहां तक घूमने आते थे। घना जंगल था। पेड़ों की छाया में खेलते थे। देखभाल न होने से बावड़ी जर्जर हुई। लोग ईंट-पत्थर तक ले जाने लगे। संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क करूंगा।
- राशिद नूर खान, पर्यावरण संरक्षणकर्ता

मैंने इन जलस्रोतों से संबंधित विभागों से जानकारी मांगी है। अभी तक किसी विभाग ने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। जब यही पता नहीं होगा कि कौन सा जलस्रोत कहां है तो उनका संरक्षण क्या करेंगे?
- डॉ. सुभाष सी पांडेय, पर्यावरणविद


बावड़ी, कुएं और तालाब पहले से भू-जल को रीचार्ज करने के सबसे अच्छे साधन हैं। मैंने कई बार अलग-अलग मंचों से इन जलस्रोतों को संरक्षित कर समय पर सफाई कराने की सलाह दी, लेकिन कोई अमल नहीं हुआ।
- डॉ. आरके श्रीवास्तव, जिओलॉजिस्ट

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