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कोरोना के डर पर भारी बीमारी का दर्द

कोरोना संक्रमण का आंकडा बढ़ा, कतार में इंतजार करें या सामाजिक दूरी की पालना, मरीजों का दबाव अधिक, चिकित्सक कम, तीन जिलों के आते है मरीज, अपनी बारी आने तक गलियों में बैठने को मजबूर है मरीज

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कोरोना के डर पर भारी बीमारी का दर्द

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ब्यावर. कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते आंकड़े ने सबके मन में डर बढाया है। इस डर पर बीमारी का दर्द भारी पड़ रहा है। बीमारी से निजात पाने के लिए वैश्विक महामारी कोरोना की गाइड लाइन की अनदेखी करना मजबूरी बन गया है। गाइड लाइन के तहत सामाजिक दूरी की पालना की जाए तो कतार से नम्बर कट जाने की चिंता होती है। घर से कई किलोमीटर का फासला तय कर उपचार करवाने पहुंच जाते है। यहां पर भी बारी आने तक कतार में रहना मजबूरी है। ऐसा अस्पताल में ही नहीं अपितु चिकित्सकों को दिखाने के दौरान भी इस समस्या से दो-दो हाथ करने होते है। वैश्विक महामारी का दौर लम्बा खींच रहा है। इस दौरान अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को इस बीमारी से संक्रमण का डर तो है लेकिन अन्य बीमारी का उपचार लेना भी जरुरी है। ब्यावर में पाली जिले के रायपुर, जैतारण, भीलवाडा जिले के बदनोर व आसींद, राजसमंद जिले के भीम व देवगढ़, नागौर कि रियाबड़ी तक के मरीजों के अलावा ब्यावर उपखंड के अलावा मसूदा व टॉडगढ उपखंड के मरीज उपचार करवाने ब्यावर आते है। यहां पर कई निजी चिकित्सालय संचालित है। इसके बावजूद चार जिलो के मरीजों का यहां पर दबाव रहता है। इसके अनुपात में शहर में चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में अमृतकौर चिकित्सालय में कतार लगती है। ऐसे ही निजी क्लिनिक एवं चिकित्सकों के घर के बाहर भी कतार नजर आती है। कई जगह पर इतनी जगह भी नहीं होती है कि मरीज सामाजिक दूरी की पालना कर सके। ऐसे में सामाजिक दूरी की पालना करना आसान नहीं होता है।

कोई खड़े-खड़े तो कोई जमीन पर बैठकर करते इंतजार

मरीज चिकित्सकों को दिखाने आते है तो कई जगह पर बैठने तक की व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में मरीज को जमीन पर बैठना पड़ता है या फिर खड़े-खड़े अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों को उपचार लेने की चिंता रहती है। इस आपाधापी में कोविड गाइड लाइन की पालना नहीं हो पाती है। यहां पर गाइड लाइन की पालना चाह कर भी नहीं कर पाते है।

निजी वाहन संचालक भी लूट रहे...

अस्पताल आने के लिए आस-पास के गांवों के लोगों को रोडवेज की सुविधा नहीं मिल पाती है। कोरोना संक्रमण के चलते रोडवेज प्रबंधन ने गाइड लाइन तय कर रखी है। इस गाइड लाइन के तहत ही स्टोपेज भी तय कर रखे है। छोटे गांवों में रोडवेज की सुविधा नहीं है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी वाहनों में आना पड़ रहा है। लोगों की इस मजबूरी का फायदा भी निजी वाहन संचालक उठा रहे है। यह संचालक मनमाना किराया वसूल रहे है। सीट टू सीट बैठाने के नाम पर संचालक दुगुना तक किराया वसूल रहे है। ऐसे में वापस समय पर अपने घर जाने के चलते मरीज जैसे-तैसे उपचार लेकर वापस अपने घर तक जाने की जुगत में गाइड लाइन को किनारे करने को मजबूर है।