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मिशन के रूप में जागरूकता से रोका जा सकता है मलेरिया

-लापरवाही और अनदेखी है मलेरिया बढऩे का कारण  

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मिशन के रूप में जागरूकता से रोका जा सकता है मलेरिया

मिशन के रूप में जागरूकता से रोका जा सकता है मलेरिया

कभी गंभीर माने जाने वाला मलेरिया अब सामान्य बीमारियों में आता है। मच्छरों से फैलने वाली बीमारी को जागरूकता से काफी हद तक रोका जा सकता है। लेकिन लापरवाही और अनदेखी के कारण करीब समाप्त हो चुका मलेरिया फिर से बढ़ा है, यह काफी चिंता का विषय है। थार में मलेरिया का कहर रहता था, लेकिन यहां पर काफी काबू किया गया। लेकिन साल 2022 में बाड़मेर-जैसलमेर में मलेरिया कहर बनकर बरपा और पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा इस बीमारी से दोनों जिलों के सैकड़ों लोग बीमार पड़े। कुछ केस में मौतें भी सामने आई लेकिन चिकित्सा विभाग ने पुष्टि नहीं की।

चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि मलेरिया प्रत्येक तीसरे साल आता रहा है। अच्छी बरसात भी इसका एक बड़ा कारण माना है। बरसात के बाद जगह-जगह पानी का भराव अधिक होने के कारण मलेरिया के मच्छर पनप जाते हैं। थार में मलेरिया के रोगी सितम्बर 2022 मेंं अचानक बढ़े थे। कई दिन तो ऐसे भी रहे जब एक ही दिन में 15 मलेरिया रोगी एक साथ सामने आए। राहत इस बात की रही कि मलेरिया पीवी के केस ज्यादा आए। पीएफ के कुछ केस ही मिले थे।

प्रदेश में सबसे अधिक केस मिले थे यहां

साल 2022 के आंकड़े देखे जाए तो बाड़मेर में प्रदेश में सबसे अधिक मलेरिया के केस मिले थे। बाड़मेर में कुल 528 केस रिपोर्ट किए गए, वहीं जैसलमेर में 332 पॉजिटिव मामले मिले। दोनों जिलों में मलेरिया कहर बना था। खासकर बच्चों के मामलों में यह बीमारी काफी गंभीर रही। वहीं युवा और बुजुर्ग भी मलेरिया की चपेट में आए।

हल्के में नहीं लें मलेरिया

मलेरिया दिवस प्रत्येक साल 25 अप्रेल को मनाया जाता है। दिवस मनाने का मकसद है कि मच्छरजनित रोग को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मलेरिया की गंभीरता को समझने के साथ इसके इलाज के लिए कदम उठाने चाहिए। मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाना एक बड़ा मिशन है। क्योंकि लोग मच्छरों से खुद को बचाने के लिए गंभीर नहीं होते हैं। अधिकांश लोग मलेरिया की गंभीरता से अनजान है। मच्छर को छोटा जीव समझकर उसके तेजी से पहनने को अनदेखा करना ही बीमारी को बढ़ावा देता है। इस अनेदखी और लापरवाही के रवैये में बदलाव के लिए यह दिवस महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह है मलेरिया दिवस का इतिहास

सबसे पहले अफ्रीका में मलेरिया-डे मनाया जाता रहा। साल 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा का 60वां सेशन आयोजित किया गया। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रस्ताव रखा कि अफ्रीका में मनाए जाने वाले मलेरिया दिवस को विश्व स्वास्थ्य मलेरिया दिवस में बदल दिया जाए। इसके बाद साल 2008 से 25 अप्रेल के दिन विश्व मलेरिया दिवस मनाने की शुरूआत हुई।

मलेरिया दिवस की थीम

प्रत्येक वर्ष विश्व मलेरिया दिवस एक नई थीम के साथ मनाने की परंपरा है। इस साल 2023 में दिवस की थीम 'रेडी टू कॉमबेट मलेरियाÓ (मलेरिया से लडऩे के लिए तैयार) रखी गई है। थीम का मकसद है कि लोगों को मलेरिया से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए जागरूक करना है।

मलेरिया से बचाएंगी ये सावधानियां

-मच्छरों को घर के अंदर या बाहर पनपने से रोकें

-आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें

-घर के हर कोने पर समय-समय पर कीटनाशक छिड़काव करवाते रहें

-मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें

-घर के आसपास पानी का भराव नहीं होना चाहिए

मलेरिया के प्रमुख लक्षण

-तेज कंपकंपी के साथ बुखार

-सिरदर्द और गले में खराश

-अधिक पसीना व थकान

-बैचेनी के साथ उल्टी होना