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बाड़मेर में हरे-भरे खेतों पर टिड्डी का हमला, फसल कर रही है चट

अकाल में नहीं आई थी टिड्डीप्रतिदिन हजारों-करोड़ों की संख्या में टिड्डी का अना जारी है। खेतों में हरी की जगह फसल टिड्डी के कारण पीली दिखाई दे रही है। रतरेडी कला निवासी भारताराम मेघवाल बताते हैं किसानों का दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ रहा है। पिछले तीन साल से अकाल था लेकिन तब एक भी टिड्डी नही आई। इस बार उम्मीद की कोई किरण दिखी तो टिड्डियां आ गई।

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बाड़मेर में हरे-भरे खेतों पर टिड्डी का हमला, फसल कर रही है चट

बाड़मेर में हरे-भरे खेतों पर टिड्डी का हमला, फसल कर रही है चट

बाड़मेर. सीमांत क्षेत्र में बीते तीन सलों से लगातार सूखे व अकाल के बाद रेगिस्तान में हरियाली छाई हे। अच्छे जमाने की उम्मीद से किसानों ने बुवाई की। अब किसानों को लगता है फसलों की टिड्डी की नजर लग गई है। खेतों में खड़ी फसल पर करोड़ों की संख्या में टिड्डी हमला कर रही है। मजबूर किसान कुछ भी कर पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
गडरारोड़ क्षेत्र में किसानों, पशुपालको के मुंह आया निवाला टिड्डिया छीन रही है। नियंत्रण के साधन नहीं होने से किसान खेतों को भगवान भरोसे छोडऩे की बात कह रहे हैं।
अकाल में नहीं आई थी टिड्डी
प्रतिदिन हजारों-करोड़ों की संख्या में टिड्डी का अना जारी है। खेतों में हरी की जगह फसल टिड्डी के कारण पीली दिखाई दे रही है। रतरेडी कला निवासी भारताराम मेघवाल बताते हैं किसानों का दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ रहा है। पिछले तीन साल से अकाल था लेकिन तब एक भी टिड्डी नही आई। इस बार उम्मीद की कोई किरण दिखी तो टिड्डियां आ गई।
सीमावर्ती क्षेत्र में डाला डेरा
पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की हरी भरी डालियों पर पीली टिड्डियों ने अपना डेरा जमा लिया है। तहसील क्षेत्र के हजारों बीघा में फैली टिड्डियों ने हड़कंप मचा दिया है। किसान परिवारों ने कुदाली छोड़ टीन के खाली डिब्बे, थाली, कटोरी उठा ली है। दिनभर टिड्डियों को भगाने के काम में लगे रहते हैं।