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म्हारो बाढ़ाणो हजारी गुल रो फूल….

म्हारो केसरियो हजारी गुल रो फूल...केसरिए न निजर लागणी.. दूल्हे के लिए गाए जाने वाले इस गीत के बोल मिश्री की तरह कानों में घुले है।

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म्हारो बाढ़ाणो हजारी गुल रो फूल....

म्हारो बाढ़ाणो हजारी गुल रो फूल....



बाड़मेर पत्रिका.

म्हारो केसरियो हजारी गुल रो फूल...केसरिए न निजर लागणी.. दूल्हे के लिए गाए जाने वाले इस गीत के बोल मिश्री की तरह कानों में घुले है। बाड़मेर यानि बाढ़ाणा निजर (नजर) न लगे इस दौर में है। पचपदरा में 75 हजार करोड़ की रिफाइनरी आसमानी बुलंदियों की ओर बढ़ रही है। मेगा प्रोजेक्ट के इर्दगिर्द एक नया संसार देखना ही नयनाभिराम है। विकास के पंख उड़ रहे बाड़मेर के लिए 2022-23 बड़ा सपना आकार लेकर साकार होने की सीढिय़ा चढ़ रहा है। कोयला, तेल, गैस और खनिज नई इबारत लिख रहे है। पत्रिका ने विकास की पूरी यात्रा में पाठक की ताकत बनकर भूमिका निभाई और तेल खोज से रिफाइनरी तक के सफर में कदम-दर-कदम आवाज उठाई...नतीजा निजर न लगे इस विकास को.. पंख लगाकर आसमां छू रहा है। बाड़मेर के गुलशन में सौहार्द और भाईचारा वो फूल है जिनकी मिसाल दी जाती है। सरहद पर बसकर भी शांति का संदेश। जाति,धर्म और वैमनस्य का जहर फैलाने वालों के बीच में एक-दूसरे के साथ देने की पाठशाला है रेगिस्तान। अकाल, अभाव से लेकर विकास तक के सफर में अब तक इस सौहार्द को निजर नहीं लगी है, लेकिन अब यह हमारी बड़ी जिम्मेदारी है कि छोटी-छोटी घटनाओं को तूल देने, उद्वेलित करने और वैमनस्य की खाइयां खोदने वालों के मंसूबों को नाकामयाब करें ताकि निजर न लगे हमारे इस मिनखपणे और अपणायत को..जो हमें जोड़े हुए है। पत्रिका ने मरूधरा के इस सौहार्द को हमेशा सर्वोपरि रखने की भूमिका निभाई है। रेगिस्तान की थाती है यहां की सांस्कृतिक विरासत। कला, संस्कृति, मेले, लोक गायकी,पशुधन, खेती-किसानी और हमारी ग्रामीण जीवन शैली...मारवाड़ी में कहते है थो-थो थूथको नांखूं.., यानि निजर न लगने का जतन। यही तो हमारा मूल है जो हमारी पहचान राष्ट्रीय-अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग करता है। इसी के बूते तो सात समंदर पार तक कलाकार पहुंचे है और देश-विदेश तक हैण्डीक्राफ्ट। आज नहीं दशकों पहले पत्रिका ने हमारी इस विरासत को न केवल पहचाना बल्कि पहचान देने का बीड़ा उठाया और अंगुली पकड़कर कला के साथ पत्रिका चला। थार महोत्सव, तिलवाड़ा मेला, लोक गायकों का प्रोत्साहन और मिट्टी से जुड़े लोगों की पहचान में साथ रहने के इस संसार को निजर न लगे। इस ताकत के असली हकदार पाठक है जो साख और विश्वास के साथ जुड़े है। सुनहरे बाड़मेर को गढऩे का एक सपना जो हम सब साझा देख रहे है उसमें खेती-किसानी, तेल-गैस और खनिज का आर्थिक विकास ही नहीं है हमारी नई पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में भी लगातार नए कदम बढ़ा रही है। कभी चिकित्सकों की कमी से इलाज करवाना मुकिश£ था लेकिन अब बाड़मेर के ही युवाओं में चिकित्सक बनने की ऐसी ललक है कि प्रदेश में सुर्खियों में आ गया है। आइएएस और आरएएस की सूची में भी साधारण परिवारों की आसाधारण प्रतिभाएं लोहा मनवाने लगी है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौर में होनहारों के बढ़ते कदम विकास के नए आयाम लिख रहे है। बेटियों को पढ़ाने का आंकड़ा भी बढऩा शुभ संकेत है और बेटों के बराबर बेटियों की संख्या छूने लगी है। विकास के साथ अपराध,नशा, हथियार और गैंग खड़े होने लगे है। यह रास्ता गलत है...समाज जब तक इस गलत से खुद को अलग नहीं करेगा यह बीमारी घटने की बजाय बढ़ेगी। जरूरी है कि हम इस रोग का इलाज करे। समय रहते। सौहार्द की बयार और आर्थिक विकास में ताकि हम हमेशा गाते रहे म्हारो बाढाणो हजारी गुल रो फूल। पत्रिका बाड़मेर संस्करण के स्थापना दिवस की बधाई....।