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दूध की सफेदी में मिलावट की कालिख,एक तिहाई नमूने फेल,दाम ले रहे पूरे, गुणवत्ता अधूरी ,मिलावट में नामी कंपनियां भी शामिल

बारां. सेहत बनाने के लिए जिस दूध को हम पी रहे हैं, असल में उसमें उतने पोषक तत्व ही नहीं है, जितने तय मानक अनुसार होने चाहिए।

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दूध की सफेदी में मिलावट की कालिख,एक तिहाई नमूने फेल,दाम ले रहे पूरे, गुणवत्ता अधूरी ,मिलावट में नामी कंपनियां भी शामिल

mithai

बारां. सेहत बनाने के लिए जिस दूध को हम पी रहे हैं, असल में उसमें उतने पोषक तत्व ही नहीं है, जितने तय मानक अनुसार होने चाहिए। यही हाल दूध से बने पदार्थों मावा, घी, पनीर, लस्सी आदि के हैं। बाजार में सैकड़ों दुकानों पर दूध व दूध से बने पदार्थ बिक रहे हैं, लेकिन पूरा दाम चुकाने के बावजूद वैसी गुणवत्ता मिल ही नहीं रही। दूध में मनमाफिक पानी मिलाया जा रहा है तो दूध से बनी चीजों में फेट निकालकर तेल, डालडा आदि बाहरी फेट डाला जा रहा है। डेयरियों के खुले दूध में ही नहीं, बल्कि नामी कंपनियों के पैकिंग दूध के भी यही हाल हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अन्तर्गत खाद्य सुरक्षा टीम द्वारा लिए जा रहे नमूनों में से औसतन एक तिहाई ऐसे नमूने फेल निकल रहे हैं। बीते छह वर्षों की अवधि में विभाग द्वारा उक्त श्रेणी के लिए गए नमूनों में सौ से ज्यादा नमूने फेल निकले हैं।
यह है मानक स्तर
विभागीय सूत्रों के अनुसार गाय के दूध में साढ़े ३ प्रतिशत, भैंस के दूध में साढ़े ५ प्रतिशत व मिश्रित दूध में साढ़े ४ प्रतिशत फेट होना चाहिए। इसके अलावा पैकिंग वाले दूध की अलग-अलग श्रेणियों में फेट की तय मात्रा अलग-अलग है। इसी तरह भैंस के दूध में ९ प्रतिशत, गाय व मिश्रित दूध में साढ़े ८ प्रतिशत एसएनएफ (सॉलिड नोट फेट) होना चाहिए। अमानक स्तर के पाए गए नमूनों में फेट व एसएनएफ की मात्रा तय स्तर से कम पाई गई। इधर, घी की आरएम व बीआर जांच होती है। इसमें आरएम २६ प्रतिशत व बीआर ४० से ४५ प्रतिशत तक होनी चाहिए।
ऐसे बिगाड़ रहे गुणवत्ता
जिले में दर्जनों की संख्या में डेयरियां संचालित हैं। इसके अलावा गांवों में दुधियों की ओर से भी घरों पर आपूर्ति होती है। बीस रुपए से लेकर पचास रुपए प्रति लीटर तक दूध बेचा जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर मनमानी हो रही है। फेट निकालने के अलावा पानी मनमर्जी से मिलाया जा रहा है। दूध से बने पदार्थों में तो मिल्क फेट निकालकर मिलावट कर इसे बेचा जा रहा है।
चार लाख जुर्माना
फेल नमूनों के मामले में विभाग की ओर से मिलावट करने वाले दुकानदारों से करीब चार लाख का जुर्माना वसूला गया। एडीएम न्याायलय में जिन मामलों में चालान पेश किए गए थे, उनमें से अब तक करीब ४३ मामलों में निर्णय हुआ है। इनमें करीब चार का जुर्माना किया गया।
& विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। फेल निकलने पर नियमानुसार चालान पेश किए जा रहे हैं। दूध व दूध से बने पदार्थों के लिए नमूनों में से काफी मात्रा में नमूने फेल निकले। निर्णय अनुसार जर्माना वसूला गया, कई मामलों में अभी निर्णय होना है।
राजेश रामचंदानी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी बारां