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बांसवाड़ा : ‘फु सफु साते वृक्ष कान में तथा एग्नि चन्र्स माय हार्ट का विमोचन

रविवार को गुरु महाराज मंदिर में समारोहपूर्वक विमोचन  

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बांसवाड़ा : 'फु सफु साते वृक्ष कान में तथा एग्नि चन्र्स माय हार्टÓ का विमोचन

बांसवाड़ा : 'फु सफु साते वृक्ष कान में तथा एग्नि चन्र्स माय हार्टÓ का विमोचन

बांसवाड़ा. साहित्य तथा कला मंच के तत्वावधान में बांसवाड़ा मूल के और वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में निवासरत वरिष्ठ साहित्यकार हरिहर झा की दो पुस्तक 'फु सफु साते वृक्ष कान में तथा एग्नि चन्र्स माय हार्टÓ का रविवार को गुरु महाराज मंदिर में समारोहपूर्वक विमोचन हुआ।

समारोह में मुख्य अतिथि नगर परिषद सभापति जैनेन्द्र त्रिवेदी ने कहा साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है। साहित्य तथा साहित्यिक गतिविधियों को जीवंत रखने के लिए शहर में एक हॉल का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें पुस्तकालय भी होगा। जिसमें यहां की कृतियों को सुरक्षित रखा जाएगा। हरिदेव जोशी की स्मृतियों को जीवित रखने समाधि स्थल पर म्यूजियम का निर्माण होगा। अध्यक्षता कर महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति राज्य समिति के सदस्य रमेशचन्द्र पंड्या ने कहा कि अक्षर ब्रह्म है। इसको संजोकर रखना हमारी प्रथम जिम्मेदारी है। उन्होंने कृति फु सफु साते वृक्ष कान में के संदर्भ में कहा कि कोई पेड़ अचानक रूबरू नहीं होना चाहता। उसकी कोई पीड़ा रही होगी, तब कवि एकाकार होता है।
विशिष्ट अतिथि उप वन संरक्षक सुगनाराम जाट ने कहा हम सौभाग्यशाली है कि हमारे पास किताबें हैं। हमारे पूर्वज ताम्रपत्र का उपयोग करते थे। वर्तमान युग डिजिटल लाइब्रेरी का है। प्रत्येक विषय पर पुस्तकें उपलब्ध है। नई पीढ़ी को इसका लाभ लेना चाहिए।

साहित्यकार झा ने पुस्तकों का परिचय देते हुए कहा कि कोलाहल में प्रकृति क्या कहना चाहती है। कुछ सुनाई नहीं देता इसीलिए कवि प्रकृति के साथ एकाकार हो जाना चाहता है। उन्होंने कहा पीड़ा मेरे दिल को मथती है। इससे मुस्कुराती हुई कविता निकलती है। विधुजा सृजन संस्थान अध्यक्ष कृष्णा भावसार व मंच अध्यक्ष डा. दीपक द्विवेदी ने पुस्तकों की समीक्षा प्रस्तुत की। भाविन याज्ञनिक ने बताया कि हरिहर झा का नाम यूएनओ के विश्व हिन्दी डेटा बेस में अंकित है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। गजेन्द्र पंड्या ने हरिहर झा की कविता पर संगीत की प्रस्तुति दी। आरम्भ में स्वागत प्रमोद झा, श्रीकान्त झा व राकेश भट्ट ने किया। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार मनमोहन झा, जानी श्रीलाल नागर, छगनलाल नागर, गजेन्द्र पंड्या, कृष्णा भावसार के साथ अप्रवासी लेखक हरिहर झा व चन्द्रावली झा का शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया गया। संचालन बृजमोहन तूफ ान ने किया। आभार महेश पंचाल माही ने व्यक्त किया।
इन साहित्यकारों की रही उपस्थिति

समारोह में भूपेन्द्र उपाध्याय तनिक, भारती भावसार, डॉ. युधिष्ठिर त्रिवेदी, हरीश आचार्य, नरेन्द्र मदनावत, सतीश आचार्य, उत्सव जैन, भारत दोसी, जलज जानी, वसी सिद्दीकी, हेमंत राही, अशोक मदहोश, निर्मल जैन, रत्नेश दवे, तारेश दवे, उत्तम मेहता सहित रचनाकार आदि उपस्थित रहे।


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