यान में अब भी 3.5 किलो ईंधन शेष कई प्रयोगों को अगले महीने दिया जाएगा अंजाम
अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को आपस में जोडऩे (डॉकिंग) और फिर उन्हें अलग करने (अनडॉकिंग) की तकनीक का सफल प्रदर्शन करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस प्रक्रिया को फिर से दोहराएगा।
इसरो के उच्च पदस्थ अधिकारियों के मुताबिक अगले महीने फिर एक बार दोनों उपग्रहों की डॉकिंग होगी। इस बार बहुप्रतीक्षित पावर ट्रांसफर प्रयोग भी किया जाएगा। यानी, दोनों उपग्रहों के बीच ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। इसरो अधिकारी के मुताबिक उपग्रहों में अभी 3.5 किलोग्राम से अधिक ईंधन बचा है। यह इन प्रयोगों के लिए पर्याप्त है।
इस मिशन के दोनों उपग्रह स्पेडेक्स-01 और स्पेडेक्स-02 (चेजर और टारगेट) पृथ्वी की 470 किमी वाली कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। दोनों उपग्रह बिल्कुल ठीक हालत में हैं। पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग और अनडॉकिंग की तकनीक में महारत हासिल करना भविष्य के मिशनों के लिए काफी आवश्यक है। चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण और गगनयान समेत भविष्य के मिशनों को इस तकनीक के सहारे पूरा किया जाएगा। अभी तक केवल रूस, अमरीका और चीन ने ही डॉकिंग तकनीक में महारत हासिल की है। भारत इस विशिष्ट क्लब का चौथा देश है।