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साइबर घोटाले का पर्दाफाश, 40 लाख रुपये की जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तारियां

पुलिस ने डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर किए गए एक साइबर अपराध की साजिश का पर्दाफाश किया है। मेंगलूरु के पुत्तूर निवासी राधाकृष्ण नायक ने सीईएन पुलिस स्टेशन में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसे घोटालेबाजों से एक वीडियो कॉल आया था, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर डिजिटल गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई, जिसमें उन पर आरटीजीएस के माध्यम से 40 लाख रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया था।

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बेंगलूरु. पुलिस ने डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर किए गए एक साइबर अपराध की साजिश का पर्दाफाश किया है। मेंगलूरु के पुत्तूर निवासी राधाकृष्ण नायक ने सीईएन पुलिस स्टेशन में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद अपराध की जानकारी पुलि‍स को मिली।

नायक को घोटालेबाजों से एक वीडियो कॉल आया था, जिसमें उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर डिजिटल गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई, जिसमें उन पर आरटीजीएस के माध्यम से 40 लाख रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया था।

नायक को जल्द ही संदेह पैदा हो गया, जिसके कारण उन्‍होंने अधिकारियों से संपर्क किया। लेन-देन के सबूतों का पीछा करते हुए दक्षिण कन्नड़ पुलिस बेलगावी जा पहुंची, जहाँ उन्होंने इस योजना से जुड़े दो संदिग्धों अविनाश सुतार (28) और अनूप कारेकर (42) को पकड़ा।

इन गिरफ्तारियों ने झारखंड के कुख्यात जामताड़ा साइबर अपराध केंद्र से जुड़े एक व्यापक ऑपरेशन पर प्रकाश डाला है। जांचकर्ताओं का कहना है कि सुतार और कारेकर ने उत्तर भारत के धोखेबाजों के साथ मिलकर टेलीग्राम का इस्तेमाल किया, और उनकी योजनाओं के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराकर कमीशन कमाया।

दक्षिण कन्नड़ में पुलिस ने इस जोड़े के तरीके का पर्दाफाश किया। वे संघर्षरत व्यक्तियों से संपर्क करते थे, वैध ऑनलाइन उपक्रमों के बहाने बैंक खाते खोलने के लिए मामूली नकदी की पेशकश करते थे। फिर इन खातों को उनके सहयोगियों को सौंप दिया जाता था, जो उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति के ज़रिए अमीर लोगों से मोटी रकम ऐंठने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे।