
बागपत सीट पर जाट और मुस्लिमों ने मिलाया हाथ तो यह जाति तय करेगी जीत
बागपत. लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही भाजपा और गठबंधन की सियासी जंग शुरू हो चुकी है। कोई विकास को लेकर जनता के पास पहुंच रहा है तो कोई युवा और किसानों की बात कर रहा है। राजनीति पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पत्रिका ने राजनीतिक विष्लेषक सतवीर सिंह राठी से चर्चा की। इस दौरान उन्होंनेकहा कि राजनीति भी अजब-गजब है। एक दौर में यहां रालोद का वर्चस्व रहा है, लेकिन आज अपनी विरासत बचाने के लिए रालोद लड़ाई लड़ रह है। चैधरी अजित सिंह और जयंत चैधरी दोनों ने ही अपनी विरासत की सीटों को छोड़कर दुसरी जगह किस्मत आजमाने में लगे हुए हैं। जयंत चैधरी मथुरा को छोडकर यहां आये हैं। उनकी मंशा शायद यहां पर सहानुभूति बटोरने की है। आधी सदी तक चैधरी परिवार ने ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।
इसलिए जनता जवाब मागेंगी कि इतना समय मिलने के बाद भी अपने क्या किया है। लेकिन इस सवालों से बचने के लिए ही चैधरी अजित सिंह ने मुजफफरनगर सीट से लड़ने का फैसला लिया है। गठबंधन की बात करें तो 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। इस बार जाटों के अलावा बसपा और सपा की वोट से गठबंधन जीत की ओर अग्रसर दिखाई दे रहा है, लेकिन अगर पुलवामा हमले के बाद की बात करें तो यहां पर परिस्थिति बदली है। यहां पर अब कांटे की टक्कर मानी जा सकती है। आज का युवा जागरूक है, वे अपने क्षेत्र ही नहीं, देश के बारे में भी बात करता है और प्रतिनिधित्व के बारे में भी सोचता है। वहीं, अगर जातिगत समीकरण की बात करें तो बहुलता में जाट व मुस्लिम हैं, जिसके बाद दलित और बाकी बिरादरीयां हैं। यही समाज चुनाव को प्रभावित करेगा। जाट और मुस्लिम गठबंधक को स्वीकार कर रहा है, लेकिन दलित वोटर को लेकर दोनों ही प्रतिद्धंदी असमंजस में है और यही वोट दोनों प्रतियाशियों की हार जीत का फैसला करेंगे। वहीं, मोदी लहर कुछ हद तक सत्यपाल सिंह के लिए वरदान साबित हो सकती है।
Published on:
27 Mar 2019 02:46 pm
बड़ी खबरें
View Allबागपत
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
