बड़वानी. शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों और इदगाहों पर अलग-अलग समय पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। नमाज में मुस्लिम समुदाय के लोग गीले-शिकवे दूर करने के लिए गले मिलें और इसके बाद अपनी बुरी आदतों को कुर्बान किया। मुस्लिम समाज की ओर से ईद-उल-अजहा ( बकरीद ) का पर्व गुरुवार को मनाया गया। सुन्नत मुस्लिम जमात व दारूल कजात के तत्वावधान में ईद की नमाज सुबह साढ़े आठ बजे पाटी रोड स्थित ईदगाह में अदा की गई। इससे पहले तकरीर पढ़ी गई।
नमाज के बाद देश में अमन चैन व तरक्की के लिए दुआ की गई। रोड नंबर 2 स्थित जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद जब्बार नूरी ने बताया कि बकरीद का पर्व इस्लाम के बहुत बड़े पैगंबर इब्राहिम व उनके बेटे इस्माइल की याद में मनाया जाता है। करीब 5 हजार साल पहले हजरत इब्राहिम ने अपने बेट इस्माइल की कुर्बानी अल्लाह की बारगाह में पेश की थी। जो अल्लाह को पसंद आई और उनकी जगह जन्नत के जानवर को कुर्बान करवाया। इसी के शुकराने में ईद की 2 रकात नमाज पढ़ी जाती है। उन्होंने जिले वासियों को ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद देते हुए कुर्बानी आम जगह पर नहीं करने एवं साफ-सफाई का ध्यान रखने की अपील की है।