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मुलायम के गढ़ में भी टूटेगी सपा, अखिलेश को झटका देंगे शिवपाल के करीबी नेता!

कुछ सपाई कर रहे मुलायम सिंह के रूख का इंतजार

आजमगढ़Aug 30, 2018 / 02:55 pm

sarveshwari Mishra

Shivpal Singh Yadav and akhilesh yadav

अखिलेश यादव और शिवपाल यादव

आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव से कुछ महीनों पहले वर्ष 2016 में शुरू हुई सपा की रार थमने का नाम नहीं ले रही है। अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले चाचा भतीजा फिर से आमने सामने है। वर्ष 2016 में सपा की रार आजमगढ़ मंडल से शुरू हुई थी। उसका सूत्रधार आजमगढ़ के ही नेता को मानते हुए कुर्सी छीन ली गई थी। अब वह नेता पार्टी में बड़े वहदे पर है लेकिन शिवपाल यादव द्वारा समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन के बाद सपा के टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। खासतौर पर वे नेता जिनकी अखिलेश और उनके करीबियों ने लगातार उपेक्षा की है और वे पार्टी में हासिएं पर चले गए है। चुनाव से पहले अगर ऐसा हुआ तो सपा के लिए मिशन-2019 मुश्किल भरा हो जाएगा।
बता दें कि वर्ष 2016 में सपा में रार कौमी एकता दल के सपा में बिलय और मुख्तार अंसारी ब्रदर को पार्टी में शामिल करने की घोषणा के बाद शुरू हुई थी। सपा में कौमी एकता दल के बिलय में शिवपाल यादव और मुलायम सिंह के करीबी कहे जाने वाले पूर्व मंत्री बलराम यादव का बड़ा हाथ था। यही वजह थी कि जब विवाद शुरू हुआ तो अखिलेश यादव ने सबसे पहले बलराम यादव से मंत्री का पद छीन लिया था। जब विवाद काफी बढ़ गया और मुलायम सिंह तथा अखिलेश यादव चुनाव आयोग पहुंचे तो बलराम यादव ने पाला बदल लिया और अखिलेश यादव के साथ खड़े हो गये। बाद में उनको ईनाम भी मिला। अखिलेश यादव ने बलराम को राष्ट्रीय महासचिव बना दिया।
अब 2019 का लोकसभा चुनाव काफी नजदीक है और समाजवादी कुनबे में विद्रोह की आग फिर भड़क उठी है। पार्टी में हासिए पर चल रहे शिवपाल यादव ने सपा से इतर समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन कर दिया है। साथ ही वे सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर से भी मिल चुके है। शिवपाल ने दावा भी किया है कि वे सपा के उपेक्षित नेता और छोटे उपेक्षित दलों को अपने साथ लाएंगे। ऐसे में यह चर्चा शुरू हो गयी है कि शिवपाल समर्थकों का रूख क्या होगा।

आजमगढ़ के शिवपाल समर्थक अभी असमंजस्य में दिख रहे है। वे मुलायम का रूख भांप रहे है कि वे सपा का समर्थन करेंगे अथवा शिवपाल के साथ जाएंगे। साथ ही उनके बीच मोर्चे के भविष्य को लेकर भी मंथन चल रहा है। अगर मुलायम सिंह ने शिवपाल के कदम का थोड़ा भी समर्थन किया तो आजमगढ़ में सपा के बड़ी संख्या में नेता अखिलेश को छोड़ शिवपाल के खेमें में भाग जाएंगे। अगर मुलायम मौन रहे तब भी कुछ शिवपाल समर्थक जो सपा में हासिए पर है उनके साथ खड़े हो जाएंगे। जिसे लेकर सपा नेतृत्व भी चिंतित दिख रहा है। कारण कि पिछले दिनों आजमगढ़ आगमन के दौरान शिवपाल यादव समर्थकों की भीड़ एकत्र कर पार्टी को अपनी ताकत दिखा चुके है।

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