
UP Politics : सत्यमेव जयते के बहाने जीत की जुगत में कांग्रेस, राह में रोड़ा बन रही बसपा और भीम आर्मी
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. तीन दशक पहले दलितों, मुसलमानों और ब्राह्मणों ने यूपी में कांग्रेस का हाथ क्या छोड़ा पार्टी न केवल सत्ता से दूर हो गयी बल्कि आज वह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। अपनी खोई हुई जमीन पाने के लिए कांग्रेस एक साथ दलितों,ब्राह्मणों और मुसलमानों को एक साथ साध रही है। आजमगढ़ में दलित और ब्राह्मणों की वर्चस्व की लड़ाई में जान गवाने वाले ग्रामप्रधान सत्यमेव जयते के बहाने कांग्रेस एक बार फिर जीत की जुगत में लग गयी है। लेकिन उसे सर्कस की रस्सी की तरह दलितों और ब्राह्मणों के साथ संतुलन साधना पड़ रहा है।
वर्ष 1989 के बाद से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। बीते विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बावजूद कांग्रेस सिर्फ 7 सीटें ही जीत सकी थी। अब पार्टी एक बार फिर पुराने वोट बैंक के सहारे सत्ता में वापसी का रास्ता तैयार करने में जुटी है। इसीलिए बांसगांव के प्रधान सत्यमेव जयते हत्याकांड को भुनाने के लिए कांग्रेस ने तरवां थाना क्षेत्र के बांसगांव में डेरा डाल दिया है।
बांसगांव राजनीति का नया अड्डा
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के निर्देश पर अब तक पार्टी के कई बड़े नेता बांसगांव जा चुके हैं। 19 अगस्त को कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष शाहनवाज आलम और अन्य नेता पीडि़त परिवार से मिलने पहुंचे थे। 20 अगस्त को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व सांसद पीएल पूनिया, बृजलाल खाबरी, आलोक प्रसाद सहित कई वरिष्ठ नेता आजमगढ़ से बांसगांव जाने के लिए निकले, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस में ही नजरबंद कर दिया। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एवं दलित कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन राउत भी कई वरिष्ठ नेताओं के साथ आजमगढ़ पहुंचे। पुलिस ने रोका तो ये नेता पैदल ही गांव की तरफ चल पड़े। कांग्रेस बांसगांव के मुद्दे को दलितों के आत्मसम्मान का मुद्दा बताते हुए प्रदेश भर में इस को लेकर प्रदर्शन की नीति बनायी है।
महाराष्ट्र से यूपी का नाता
नितिन राउत का कहना था कि आजमगढ़ में दलित प्रधान की हत्या की गयी। वह मेरे परिवार का सदस्य था। मैं उसके परिवार से मिलने जा रहा था। हमने पहले ही यूपी सरकार और प्रशासन को सूचित कर दिया था। फिर भी हमें रोकने की कोशिश की गयी।
कांग्रेस की मुश्किल
अनुसूचित जातियों को लुभाने में जुटी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बसपा प्रमुख मायावती हैं। बसपा की आक्रामकता की वजह से कांग्रेस की दाल नहीं गल पा रही। रही सही कसर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पूरी कर रहे हैं। आजमगढ़ में कांग्रेसियों का प्रदर्शन चल रहा था तभी हंगामे के बीच भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर भी दल-बल के साथ वहां पहुंच गये। बांसगांव जाने की अनुमति नहीं मिली तो वह भी हंगामा करते हुए जिले की सीमा पर धरने पर बैठ गये।
Published on:
21 Aug 2020 06:57 pm
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