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अयोध्या

वीडियो : देखें रामनगरी के सरयू तट के किनारे ऐसे हुई वट सावित्री व्रत की पूजा

पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री मृत्‍यु के देवता यमराज से अपने पति सत्‍यवान के प्राण वापस ले आई थी

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अयोध्या : पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री मृत्‍यु के देवता यमराज से अपने पति सत्‍यवान के प्राण वापस ले आई थी | वट सावित्री की पूजा के महत्व की बात करे तो वट का मतलब होता है बरगद का पेड. बरगद एक विशाल पेड़ होता है | इसमें कई जटाएं निकली होती हैं | इस व्रत में वट का बहुत महत्व है. कहते हैं कि इसी पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति को यमराज से वापस पाया था | सावित्री को देवी का रूप माना जाता है, हिंदू पुराण में बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है | मान्यता के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शि‍व उपरी भाग में रहते हैं | यही वजह है कि यह माना जाता है कि इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है |