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जब शवयात्रा में राम नाम सत्य है बोलने से डरने लगे लोग, गंगा नहाने पर पिटाई; माथे पर तिलक दिखा तो भेजे गए जेल

29 अक्टूबर 1990, मुर्दे जिंदा हो गए तो? इसलिए गिरफ्तार कर लो। हालत यह था कि सरयू तट पर शवों के अंतिम संस्कार पर रोक लग गई। चारों तरफ किलेबंदी, यहां तक कि बीमारी से तड़पते मरीज को ले जाने वाली एंबुलेंस को भी रोका गया। मुलायम सिंह यादव की सरकार और कारसेवा की तैयारी। आइए जानते हैं विस्तार से मार्कण्डेय पाण्डेय से।

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प्रदेश भर में कर्फ्यू जैसा माहौल। गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। यहां तक कि माथे पर कोई तिलक चंदन लगाया हो तो सलाखों में पहुंचा दिया जाता।

Ram Mandir Katha: प्रधानमंत्री वीपी सिंह को दी गई चार महीने की मोहलत खत्म हो चुकी थी। ...और अब हरिद्वार में संतों ने घोषणा कर दिया था कि 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवा होगी। यूपी में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे, जो पहले ही मुसलमानों को हथियार उठा लेने और एकजुट होकर विरोध करने की नसीहत भी दे चुके थे। मुलायम ने सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर लिया था।

चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात। जमीन से लेकर आसमान तक निगहबानी होने लगी। अयोध्या की तरफ जाने वाले रास्ते सील कर दिए गए। यहां तक कि नदी, नाले, खेत, खलिहान, पगडंडी कहीं से भी अयोध्या में कोई कारसेवक न प्रवेश कर पाए। कुलमिलाकर मुलायम सिंह यादव ने ठीक ही कहा था कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। आगे पढ़ने से पहले, आप यह वीडियो देख सकते हैं। इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे अयोध्या मुलायम सरकार के आतंक की वजह से दहशत में थी।

संगीनों के साये में कैद अयोध्या

29 अक्टूबर 1990 को बीमारी से तड़पते मरीज को भी डाक्टर के पास ले जाने के लिए रोक लगा दिया गया। क्या पता मरीज ही कारसेवक न हो। यहां तक कि शव के अंतिम संस्कार के लिए सरयू तट पर ले जाने पर भी रोक लग गई। मुलायम सरकार को भय था कि मुर्दा कारसेवक बनकर जिंदा न हो जाए।

IMAGE CREDIT: प्रतीकात्मक तस्वीर(माथे पर तिलक लगाए लोग)

प्रदेश भर में कर्फ्यू जैसा माहौल। गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। यहां तक कि माथे पर कोई तिलक चंदन लगाया हो तो सलाखों में पहुंचा दिया जाता। विहिप, बजरंग दल, आरएसएस के कार्यकर्ताओं की खोजबीन, धरपकड़ शुरू हो गई। देर रात तक कार्यकर्ताओं के घर पर पुलिस ने छापा मारना शुरू किया। जैसे किसी बड़े अपराधी को पुलिस को पकड़ना है। इधर, लखनऊ में मुख्ममंत्री मुलायम सिंह यादव रोज समीक्षा करने लगे आज कितने गिरफ्तार हुए?

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काशी में गंगा नहाने पर अघोषित रोक

कारसेवा से मुलायम सरकार इतनी भयभीत थी कि काशी में गंगा नहाने आए लोगों की पिटाई शुरू हो गई। बाबा विश्वनाथ दर्शन करने जाने वालों से सरकार डरने लगी और उनको कारसेवक मान लिया गया। डर का आलम यह था कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पूजा करने आए राजस्थान के ग्रामीणों को पुलिस ने दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया।

देवरिया, गोरखपुर, बस्ती, सुल्तानपुर, प्रयाग, प्रतापगढ़, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, बहराईच, अंबेदकरनगर, आजमगढ़ कोई ऐसा जिला नहीं था जो पुलिस छावनी न बन गया हो। फैजाबाद की तरफ आने वाले रास्तें सील कर दिए गए। यहां तक कि नदी, नाले, खेत, खलिहान तक की निगरानी शुरू हो गई। प्रयाग में नाव पर बैठै लोगों को उतार कर पीटा जाने लगा। कहीं नाव से ही अयोध्या न चले जाएं।

समाचार पत्रों पर लगी बंदिशें

हालात की जानकारी लोगों को न होने पाए तो सरकार क्या करे। फौरन सभी समाचार पत्रों को निर्देश दे दिया गया। उनकी आजादी खत्म कर दी गई। उनके प्रकाशन और वितरण पर कड़ी नजर रखी जाने लगी। सीतापुर, उन्नाव, लखनऊ, मुरादाबाद, बरेली जिन जिलों में कारसेवक गिरफ्तार कर जेल भेजे गए वहां उनकी पिटाई हुई।

सजायाफ्ता कैदियों को उकसाया गया। उत्तर प्रदेश में भाजपा, आरएसएस, विहिप के पदाधिकारी और इससे जुड़े कार्यकर्ता कारसेवा की तिथि से पहले ही अपराधियों की तरह गिरफ्तार कर लिए गए। जो भी उत्तर प्रदेश के बाहर से आ रहा था। उसे पकड़ लिया जाता। यदि वह हिंदी भाषी नहीं है और नार्थ ईस्ट या दक्षिण भारत से हैं तो पक्का कारसेवक होगा। यह मानकर गिरफ्तार भी करते और पिटाई भी हो जाती।

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रामनाम सत्य बोला तो कारसेवक ही होगा

मुलायम सिंह यादव सरकार का कहर जारी था। किसी भी कीमत पर रामभक्तों को अयोध्या नहीं पहुंचने देने को सरकार संकल्पबद्ध थी। सरकार ने दंभ भरा कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। यह सिर्फ इसलिए कि उस राम की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने की मांग थी, जो राम करोड़ों हिंदुओं की आस्था हैं। जिस राम का नाम लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंतिम सांसे ली।

जिस राम को प्रसिद्ध शायर अल्लामा इकबाल इमामे हिंद कहते हैं। जिसे गोस्वामी तुलसी दास से लेकर कबीर तक कालीदास से लेकर बाणभट्ट तक। भवभूति, क्षेमेंद्र, प्रवरसेन, राजशेखर, कुमारदास, विश्वनाथ, सोमदेव और राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त तक, केशवदास, समर्थ रामदास से लेकर दक्षिण के संत तुकडोजी तक राम की महिमा में काव्यों, महाकाव्यों की रचना करते हैं।

जो राम भारत के गर्भनाल से जुड़े हैं। जो राम विदेशों में बसे गिरमिटिया समाज के संघर्ष के प्रतीक हैं। जो राम भारत की चेतना को हजारों सालों से जीवंत किए हैं। जो राम जीवन से लेकर मरण तक भारतीय समाज में रचे बसे हैं। उनके जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण की मांग थी। उसके लिए लाखों बलिदान दिया गया। कारण कि एक विदेशी धर्मांध आक्रांता बाबर ने इसे तोड़ दिया था। लेकिन सेकुलरिज्म की सरकारी अफीम में मदहोश सरकारें रामभक्तों पर जुल्म और सितम ढ़ाने में मुगलिया और ब्रिटानिया अंदाज को भी बौना साबित करने लगी थी।

आंतक, डर, दहशत के साए में था उत्तर प्रदेश। अपने परिजन की शव यात्रा में शामिल लोग डर के मारे रामनाम सत्य है, नहीं बोल सकते। पुलिस गिरफ्तार कर लेगी। यहां तक कि रामनाम सत्य है बोलने के लिए न्यायायल से मंजूरी लेनी पड़ी। चौदह कोसी, पंचकोसी परिक्रमा चलने देने, गिरफ्तार लोगों का रिहा करने और शिलान्यास स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए हाईकोर्ट के आदेश मुलायम सरकार के लिए रद्दी साबित हुए। जारी रखेंगे... ।