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Dan Puny: हेमंत ऋतु में इन चीजों के दान से मिलता है विशेष फल, जानें इस महीने का महत्व

हेमंत ऋतु का महत्व, जानें इस महीने में क्या करें दान

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Pravin Pandey

Dec 09, 2023

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हेमंत ऋतु में दान पुण्य

शरद पूर्णिमा के बाद से हेमंत ऋतु प्रारंभ होती है। बारह मासों में से तीन कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष मास हेमंत ऋतु में आते हैं। इस ऋतु में कई शुभ तिथि और त्योहार आते हैं। हेमंत को पितरों की ऋतु भी कहा गया है। इस दौरान सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और पूजा-पाठ करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इस ऋतु में सूर्य वृश्चिक और धनु राशि में रहता है। सूर्य की इस स्थिति के प्रभाव से धर्म और परोपकार के विचार आते हैं। इस समय दान पुण्य करना चाहिए। 21 दिसंबर के बाद सूर्य उत्तरायण में हो जाता है। इस बार हेमंत ऋतु का समापन 22 दिसंबर को होगा। हल्के गुलाबी जाड़े (सर्दी) को हेमंत ऋतु का नाम दिया गया है, जबकि ज्यादा ठंड को शिशिर ऋतु कहा जाता है। असल में, दोनों ऋतुओं ने हमारी परंपराओं को अनेक रूपों में प्रभावित किया है।


हेमंत ऋतु के बाद शुरू होती है शिशिर ऋतु
हेमंत ऋतु में राते धीरे-धीरे बड़ी और दिन छोटे होते जाते हैं। इस ऋतु के बाद शिशिर ऋतु आरंभ होती है। इस बार शिशिर ऋतु 22 दिसंबर से 20 मार्च, 2024 तक रहेगी। इस ऋतु में कड़ाके की ठंड पड़ती है।


तिल-मूंगफली के दान का है महत्त्व
1. ज्योतिषाचार्य स्वामी नरहरि दास के अनुसार इस ऋतु में भगवान कृष्ण की पूजा के साथ स्नान और दान की परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। इस ऋतु में तिल, मूंगफली, अनाज, भूमि और गर्म वस्त्रों का दान किया जाना चाहिए।
2. हेमंत ऋतु में उत्पन्न एकादशी का पर्व भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन एकादशी की उत्पत्ति हुई थी। इस एकादशी का उपवास करने का विशेष महत्त्व है।