Ambikapur MIC: एमआईसी में 10 पार्षदों को किया गया है शामिल, सभी को बांटे गए महत्वपूर्ण विभाग, वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे का नाम शामिल नहीं किए जाने की हो रही चर्चा
अंबिकापुर. अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने सोमवार को मेयर इन काउंसिल (Ambikapur MIC) का गठन कर दिया है। एमआईसी में 10 पार्षदों को जगह दी गई है, जिसमें 4 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा टीम में वरिष्ठ पार्षदों के अलावा पहली बार चुनाव जीतकर पार्षद बने 5 लोगों को भी शामिल किया गया है। सूची जारी होने के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्षद आलोक दुबे को एमआईसी में शामिल नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। जबकि इनका नाम सभापति पद की दावेदारी में भी शामिल था।
मेयर इन काउंसिल (Ambikapur MIC) का गठन छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत निहित प्रावधान और प्रदत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए मेयर मंजूषा भगत ने किया है। निर्वाचित पार्षदों में से मेयर इन काउंसिल का गठन करते हुए उन्हें संबंधित विभागों का प्रभारी सदस्य नियुक्त किया है।
महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि सभी वर्गों को ध्यान में रखकर 10 सदस्यीय पार्षदों को मेयर इन काउंसिल में शामिल किया गया है। दो बार पार्षद रहे मनीष सिंह को आवास, पर्यावरण एवं लोक निर्माण विभाग, जितेन्द्र सोनी उर्फ अज्जू को जल कार्य विभाग, ममता तिवारी को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, अनिता रविन्द्र गुप्त भारती को बाजार विभाग,
सुशांत घोष को शिक्षा विभाग, प्रियंका गुप्ता को महिला तथा बाल कल्याण विभाग, विपिन कुमार पांडेय को खाद्य तथा नागरिक आपूर्ति विभाग, रविकांत रांव को पुनर्वास तथा नियोजन विभाग, श्वेता गुप्ता को राजस्व विभाग व विशाल गोस्वामी उर्फ दूधनाथ को विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग (Ambikapur MIC) की जिम्मेदारी दी गई है।
10 सदस्यीय एमआईसी (Ambikapur MIC) की टीम में पुराने पार्षदों के साथ-साथ नए पार्षदों को भी शामिल किया गया है। मनीष सिंह 2 बार पार्षद रह चुके हैं। अनिता रविन्द्र गुप्त भारती 2 बार, सुशांत घोष 3 बार, श्वेता गुप्ता 3 व विशाल गोस्वामी 3 बार पार्षद रह चुके हैं। इसके अलावा पहली बार चुनाव जीतकर पार्षद बने जितेन्द्र सोनी उर्फ अज्जू, ममता तिवारी, प्रियंका गुप्ता, विपिन पांडेय, रविकांत उरांव को भी टीम में शामिल किया गया है।
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्षद आलोक दुबे को महापौर ने किसी भी विभाग (Ambikapur MIC) की जिम्मेदारी नहीं सौंपी हैं। आलोक दुबे को एमआईसी में शामिल नहीं किया गया है। जबकि इनका नाम सभापति पद की दावेदारी में भी शामिल था।
इनका नाम एमआईसी में शामिल नहीं किए जाने जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। इस संबंध में महापौर ने कहा कि उन्होंने खुद एमआईसी सदस्य बनने में रुचि नहीं दिखाई।
महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि एमआईसी (Ambikapur MIC) की बैठक से पूर्व एमआईसी का गठन जरूरी था। एमआईसी टीम मेंं सभी वर्गों को शामिल किया गया है, ताकि विभागीय कार्य में किसी तरह का कोई लापरवाही न हो।
सभी पार्षद योग्य हैं। शहर के चहुंमुखी विकास के लिए सभी मिलकर बेहतर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर नगर निगम को स्वच्छता में बेहतर रैंकिंग मिले, इसके लिए पहले दिन से ही कवायद शुरू कर दी गई है।