गौरतलब है कि अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर एसएस इंफ्राबिल्ड इन दिनों 14 से 18 वें किलोमीटर के बीच सडक़ बना रहा है। 1 से 3 किलोमीटर के काम के आधार पर रनिंग बिल भी अफसरों ने दे दिया है। लेकिन इसी पैच में जगह-जगह सडक़ उखड़ गई है। ठेका कंपनी इसके लिए डीपीआर को दोष देती है।
वहीं विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत का नतीजा है। डामर एवं अन्य मटेरियल्स की मिक्सिंग और उसे बिछाने के दौरान की जाने वाली लापरवाही से सडक़ के उखडऩे के चांसेस बढ़ जाते हैं। अमूमन टायरिंग के बाद इतनी जल्दी कोई सडक़ बार-बार नहीं उखड़ती।
कॉलेज के पीछे रोड पर हादसों का डर
पीजी कॉलेज के पिछले हिस्से (बनारस मार्ग) में हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। कॉलेज के पीछे कई जगहों पर सडक़ के उखड़ जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। कॉलेज के अलावा इस सडक़ पर कई निजी स्कूलों और दफ्तरों के अफसर भी रोजाना आना-जाना करते हैं। गड्ढों की वजह से आए दिन छोटे हादसों की खबर मिलती रहती है।
पीजी कॉलेज के पिछले हिस्से (बनारस मार्ग) में हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। कॉलेज के पीछे कई जगहों पर सडक़ के उखड़ जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। कॉलेज के अलावा इस सडक़ पर कई निजी स्कूलों और दफ्तरों के अफसर भी रोजाना आना-जाना करते हैं। गड्ढों की वजह से आए दिन छोटे हादसों की खबर मिलती रहती है।
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गड्ढों में भरी गई थी पीली मिट्टी
किलोमीटर 1 से 3 के आसपास दर्जनों स्ट्रीट वेंडर्स हैं। पत्रिका की टीम ने इनसे बातचीत की। इनमें से नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ वेंडर्स ने बताया कि डाइट के गेट से आगे भी एक जगह पर सडक़ कुछ दिन पहले उखड़ गई थी। इसे ठेका कंपनी के लोगों ने पीली मिट्टी/मुरुम से भर दिया था। अब ये फिर से उखड़ गई है।
जो पूछना है साइट पर आकर पूछिए
मैं आपको कुछ नहीं बता सकती। आपको जो बात करनी है ऑफिस जाकर मेरे अफसरों से कीजिये। मैं साइट पर हूं। आपको जो पूछना है यहां आकर पूछ लीजिए।
संगीता जायसवाल, सब-इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी