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बसपा प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर डॉ अम्बेडकर को लेकर भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

समाज के दलित और दबे कुचले लोग डॉ अम्बेडकर को बाबा साहेब के रूप में याद ही नहीं करते बल्कि उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।

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AMBEDKAR NAGAR

अम्बेडकर नगर. आजाद भारत के इतिहास में भारतीय संविधान के रचयिता के रूप में डॉ भीम राव अम्बेडकर नगर का नाम तो लिया जाता ही है साथ ही देश में जातिगत आधारों पर फैली बुराइयों और भेदभाव को समाप्त कराने में डॉ भीम राव अम्बेडकर का योगदान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी आधार पर समाज के दलित और दबे कुचले लोग डॉ अम्बेडकर को बाबा साहेब के रूप में याद ही नहीं करते बल्कि उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। 14 अप्रैल को प्रतिवर्ष बाबा साहब की जयंती जिस तरह से मनाई जाती है, वैसा कम ही महापुरुषों की जयंती के अवसर पर देखने को मिलता है।


भारतीय राजनीति में बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर का कितना महत्व है, इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ उन्हीं के नाम पर कई पार्टियों की किस्मत चमक जाती है और कई पार्टियां सत्ता से दूर भी हो जाती हैं। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से डॉ. भीमराव अम्बेडकर का महत्व भारतीय जनता पार्टी में भी न सिर्फ बढ़ा बल्कि उनकी जयंती के अवसर पर अब भाजपा भी खुलकर इसे किसी पर्व की भांति मनाने लगी है, लेकिन प्रदेश में योगी के शासन में पुलिस विभाग में जिस तरह से इस महापुरुष को अपमानित होना पड़ रहा है।


इसी को लेकर बसपा के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहाकि भाजपा सत्ता में आने के बाद जिस तरह से बाबा साहब का इस्तेमाल कर रही है और उनकी फोटो सभी आफिसों में लगाने का दिखावा कर रही है, वह सब केवल राजनीती से प्रेरित है। असल में बाबा साहब का सम्मान सिर्फ बहुजन समाज के लोग और मायावती ही करती हैं। राजभर ने कहा कि अलीगंज थाने में बाबा साहब की मूर्ति को अपमानित ढंग से रखा गया है, उसके लिए अधिकारीयों से बात करके उन्हें सही जगह पर स्थापित कराया जाएगा।


दो साल से गंदे कम्बल में रस्सी से बंधे हुए हैं बाबा साहब
जिस बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर को दलित और अनुसूचित जाति के लोग भगवान की तरह पूजते हैं और जिस बाबा साहब के नाम पर कितनी ही राजनीतिक पार्टियों के भाग्य का उदय हो जाता है। उन्ही बाबा साहब को अगर पुलिस थाने में गंदे कम्बल से उनका मुंह ढक कर रस्सी से बांध कर ऐसी जगह रख दिया हो, जो थाने की सबसे गंदगी का क्षेत्र हो तो इसे क्या कहा जाय।


मामला अम्बेडकर नगर जिले के अलीगंज थाने का है। इस थाना क्षेत्र के एक गांव फरीद पुर क़ुतुब में एक साल पहले हुए विवाद के कारण पुलिस बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति थाने उठा लाई थी, लेकिन पुलिस इस मूर्ति को सम्मान देने के बजाय एक फटे पुराने कम्बल से उनका मुंह और शरीर ढक कर उन्हें रास्सी से ऐसे बांध दिया है, जैसे गले में फांसी का फंदा डाला गया हो। गांव वालों का कहना है कि पुलिस पहले गांव के दलित समाज के जिम्मेदार लोगों को थाणे में लाकर बंद कर दिया था और बाद में सुरक्षित भूमि से बाबा साहब को उठाकर थाणे ले आई और तभी से इस तरह से बाबा साहब को अपमानित किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही अलीगंज थाने का रंग रोगन भी कराया गया और उस समय भी किसी पुलिस कर्मी को बाबा साहब का ख्याल नहीं आया, जिसका परिणाम यह रहा कि पुताई के समय के छींटे भी बाबा साहब के ऊपर साफ़ तौर पर देखे जा सकते हैं।


जिला है बाबा साहब के मानने वालों का गढ़
अम्बेडकर नगर जिले का गठन ही बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने 1995 में किया था। इस जिले में बाबा साहब के मानने वालों की संख्या सर्वाधिक है। बहुजन समाज पार्टी के शासन में इस जिले का चहुमुखी विकास भी हुआ और वर्तमान में न सिर्फ प्रदेश बसपा अध्यक्ष राम अचल राजभर ही इस जिले के निवासी हैं बल्कि बसपा के दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष लालजी वर्मा भी इसी जिले के रहने वाले हैं। अलीगंज थाने का गठन भी बसपा के ही शासन काल में किया गया था और थाना भवन का शिलान्यास एवं उद्घाटन भी लालजी वर्मा ने ही किया था इसके बाद भी दो साल से बाबा साहब की मूर्ति को गन्दगी में रखकर अपमानित किया जा रहा है।