अजमेर. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में छोटे और बड़े कुल की रस्म का नजारा रोचक होता है। इसमें दरगाह की केवड़े और गुलाब जल से धुलाई होती है। यह नजारा सालभर में एक ही बार दिखता है। हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले अकीदतमंद दरगाह की धुलाई के बाद इसे तबर्रुक के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बरसों पुरानी दंत कथाओं और मान्यताओं के अनुसारइस गुलाब जल और केवड़ा युक्त पानी के सेवन से कई बीमारियां दूर होती हैं।