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देखें कैसा है जतोई दरबार

सिन्ध संस्कृति के होते हैं दर्शन, भगवान झूलेलाल की सबसे बड़ी प्रतिमा, सिन्धी, सिक्ख एवं सभी धर्मों के आते हैं अनुयायी- स्वामी दादूराम ने पाकिस्तान के जतोई शहर से आकर की दरबार की स्थापना

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देखें कैसा है जतोई दरबार

देखें कैसा है जतोई दरबार

अजमेर. जतोई दरबार सिन्धी समुदाय ही नहीं सभी पंथों के आस्था का केन्द्र है। सिक्ख, सिन्धी एवं सभी पंथों के अनुयायी यहां दर्शन करने आते हैं। अजमेर में धार्मिक स्थलों के प्रमुख स्थलों में जतोई दरबार का विशेष स्थान है।

सावित्री चौराहा के पास नगीना बाग स्थित जतोई दरबार में राजस्थान ही नहीं देशभर के अनुयायी यहां दर्शन के लिए आते हैं। दरबार में आस्था रखने वाले कई एनआरआई भी आकर यहां दरबार साहिब में स्वामी दादूराम साहिब को नमन करते हैं। हर शिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा, नवरात्र की अष्टमी को यहां मेला भरता है। ट्रस्ट की ओर से नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, गर्मी में शीतल पेय वितरण की सेवा की जाती है। लॉकडाउन में जरूरतमंद को भोजन आदि की सेवा की गई।

हर साल मनाते हैं वर्षी महोत्सव

पाकिस्तान के जतोई शहर में करीब 225 वर्ष पूर्व दरबार स्थापित हुआ था। स्वामी दांदूराम साहिब 1936 में वहां गद्दीनशीन हुए। 1947 में भारत-पाक बंटवारे के बाद वे अजमेर आ गए। यहां जीवन के 13 साल 10 रुपए किराए का भवन लेकर वे इस स्थान पर रहे। यहां जो भी चढ़ावा आता उसे अमृतसर गुरूग्रंथ साहिब के लिए भिजवा देते थे। 9 अक्टूबर 1959 को वे चिरनिद्रा में लीन हो गए। हर साल वर्षी महोत्सव मनाया जाता है।

मुख्य दरबा्र में इनके होते हैं दर्शन

स्वामी दांदूराम साहिब के तपस्या वाले स्थान खाट, तपस्या स्थली व कड़ाऊ विराजमान है।

अब भी स्वामीजी गद्दीनशीन

जतोई दरबार के गद्दीनशीन भी स्वामी दांदूराम जी ही हैं। उन्हीं के नाम से स्वामी दांदूराम दरबार ट्रस्ट के नाम से संचालित हैं, बैंक अकाउंट आदि उनके नाम से है। ट्रस्ट में अन्य लोग सेवादार के रूप में कार्य करते हैं।

जतोई दरबार में यह है खास

- स्वामी दांदूराम साहिब का दरबार

- शिवजी की विशाल प्रतिमा- 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित

- वैष्णो देवी की गुफा- महाकाल का मंदिर, औंकारेश्वर के पाषाण से निर्मित

- भगवान झूलेलाल की 21 फीट ऊंची प्रतिमा

दरबार का जारी है विस्तार

किराए के भवन में स्वामी दांदूराम साहिब ने दरबार शुरू किया। बाद में ट्रस्ट के व्यक्ति ने ही 20 हजार रुपए में यह भवन दान कर दिया। अब अन्य भवन लेकर भी दरबार का विस्तार कार्य चल रहा है। सभी ट्रस्टी सेवादार के रूप में कार्य करते हैं। यहां सिन्धी, सिक्ख व सभी पंथ-धर्म के अनुयायी दर्शन को आते हैं।

- फतनदास, सेवादार जतोई दरबार साहिब अजमेर