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- राजस्व मंडल में प्रदेश भर से आए हजारों रेफरेंस निपटाए
- सरकारी रिकॉर्ड में बता रहे तालाब, मौके पर काश्त व निर्माण
दिलीप शर्माअजमेर. प्रदेश में जल संरचनाओं के बहाव क्षेत्र को बरकरार रखने के लिए 1947 की स्थिति बहाल करने वाली राजस्थान हाईकोर्ट के 20 साल पुरानी बहुचर्चित पीआईएल अब्दुल रहमान बनाम सरकार के निर्णय की पालना सिर्फ कागजों में हो रही है। प्रदेश भर के जिला कलक्टर की ओर से राजस्व मंडल में आए 15 हजार रेफरेंस मामलों में से करीब 70 प्रतिशत रेफरेंस कागजी रिपोर्ट के आधार पर तय कर दिए गए। उधर हाईकोर्ट में भी मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट की पालना पूरी होने के आधार पर प्रकरण को बंद कर दिया गया। इस संबंध में ‘राजस्थान पत्रिका’ ने राजस्व मंडल के वरिष्ठ वकीलों से प्रकरण की तथ्यात्मक हकीकत जानी।
यह है मामला
नागौर जिले के गांव मारवाड़ बालिया निवासी अब्दुल रहमान ने सरकार के खिलाफ 2003 में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें बताया था कि गांव के खसरा संख्या 253 में नाडी की जमीन 9.17 बीघा है। खसरा संख्या 266 में चारागाह भूमि है। तत्कालीन ग्राम पंचायत सरपंच ने नाडी की नौ बीघा जमीन में स्कूल भवन निर्माण शुरू करा दिया व अन्य लोगों ने भी अतिक्रमण कर लिए। याचिका इस सारी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। सरकार ने अपने जवाब में ऐसे क्षेत्रों में पहले से ही अनेक निर्माण होना बताया।
कोर्ट के निर्देश पर कमेटी ने सौंपी थी रिपोर्ट
18 जुलाई 2003 को हाईकोर्ट ने सिंचाई, जलग्रहण, वन व खान विभागों के अधिकारियों की कमेटी गठित कर जनरल सर्वे करने को कहा। कमेटी द्वारा उदयपुर, राजसमंद, अजमेर आदि जिलों में बहाव क्षेत्रों का सर्वे कर कोर्ट को सौंपे गए 15 सुझावों के बाद हाईकोर्ट ने बहाव क्षेत्रों नाला, नदी में 1947 की स्थिति बहाल करने के आदेश दिए। खातेदारी दी गई है तो बेदखली कर जमीन सरकार के नाम दर्ज करने व मौके पर पानी का बहाव बाधित करने वाले निर्माण हटाकर बहाव क्षेत्र को गहरा करने को कहा। झील-तालाब किनारे पक्का नाला बनाने के निर्देश दिए जिससे शहरी औद्योगिक अपशिष्ट पानी को दूषित न करें।
जिला कलक्टर ने तहसीलदारों को दिए आदेश
हाईकोर्ट के आदेश पर जिला कलक्टर ने तहसीलदारों को रिकार्ड चेक करने को कहा। तहसीलदारों ने उपखंड अधिकारी से राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर बहाव क्षेत्र में बने निर्माण चिन्हित कर उन्हें हटाने के लिए रेफरेंस कलक्टर को प्रेषित कर दिए। जिसके बाद विभिन्न जिला कलक्टर ने हजारों रेफरेंस बनाकर राजस्व मंडल में भेज दिए। इनकी संख्या करीब 15 हजार से अधिक है। मंडल द्वारा रेफरेंस मंजूर करने पर सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी जिसके आधार पर प्रकरण को हाईकोर्ट में बंद कर दिया।
विशेषज्ञों की राय
हाईकोर्ट ने कमेटी के जरिए जो निर्देश दिए वह मौके पर जाकर सर्वे करना था। रेफरेंस बनाने से पहले सर्वे नहीं हुए। केवल राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर भूमि की किस्म मानकर रेफरेंस बना दिए गए। खातेदारी की भूमि भी सरकार में निहित कर दी गई। बहाव क्षेत्र को क्लीयर करने पर अदालत के आदेश की शत-प्रतिशत सार्थकता होती।
घनश्याम सिंह लखावत, वरिष्ठ वकील,राजस्व मंडल
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1947 की स्थिति बहाल करने का आदेश कई बहाव क्षेत्रों में आर्मी एरिया, फायरिंग रेंज आदि होने पर लागू नहीं किया जा सका। कई नाडी नदी क्षेत्र में बरसों से पानी नहीं आया वहां खेती की जा रही है। जागीर उन्मूलन एक्ट आने पर कई घरानों की पीपी प्राॅपर्टी में तालाब, नदी शामिल थे। यहां भी दिक्कतें आईं। कुछ जगह कलक्टर ने काश्तकारी अधिनियम की धारा 16 के तहत भूमि आवंटन किया। वहां भी बेदखली संभव नहीं दिखी।
वीरेन्द्र सिंह राठौड़, पूर्व बार अध्यक्ष, राजस्व मंडल।
Published on:
30 Mar 2025 11:43 pm
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