अजमेर

India Lock down: परीक्षाओं में देरी से गड़बड़ाएगा नया सत्र, संस्थानों की बढ़ेंगी परेशानी

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण स्थगित हुई है परीक्षाएं

अजमेरMar 26, 2020 / 06:22 am

raktim tiwari

exam effect on session

रक्तिम तिवारी/अजमेर.
सीबीएसई, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सहित देश के सभी विश्वविद्यालयों की सालाना परीक्षाओं में देरी होना तय है। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पहले 31 मार्च तक परीक्षाएं स्थगित की गई थीं। अब देशभर में लॉक डाउन को देखते हुए परीक्षाएं स्वत: ही 14 अप्रेल तक टल गई हैं। ऐसे संस्थानों और विद्यार्थियों की दिक्कतें बढ़ेंगी। स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नए सत्र तक इसका असर पड़ेगा।
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं मार्च के शुरुआत और सीबीएसई की दसवीं-बारहवीं परीक्षाएं फरवरी से जारी हैं। इसी तरह प्रदेश में अजमेर सहित जयपुर जोधपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा, बीकानेर और अन्य विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर विषयों की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इस दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के चलते संस्थाओं को 31 मार्च तक परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रेल तक समूचे देश को लॉकडाउन करने की घोषणा की है।
परीक्षाओं पर लॉक, परिणाम में देरी
सीबीएसई, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय और राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं 14 अप्रेल तक लॉकडाउन हो गई हैं। पूर्व निर्धारित टाइम टेबल के मुताबिक सीबीएसई और राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं तो अप्रेल में खत्म हो रही थीं। इसके बाद दोनों संस्थान मई में परिणाम जारी करने वाले थे। लेकिन अब परीक्षा और परिणाम में विलंब होना तय है। विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं भी मई-जून अथवा जुलाई-अगस्त तक चलने के आसार हैं।
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जेईई मेन द्वितीय चरण स्थगित
पूर्व में जेईई मेन द्वितीय चरण की परीक्षा 5 से 11 अप्रेल तक होनी थीं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इन्हें स्थगित कर दिया है। अब इस परीक्षा और परिणाम में भी देरी होगी। मालूम हो कि जेईई मेन प्रथम चरण की परीक्षा 6 से 9 जनवरी तक हुई थी।
परीक्षाओं से पड़ेगा सत्र पर असर …
परीक्षा में जितना विलंब होगा, कॉपियों की जांच और परिणाम में देरी होगी। इन सबका असर सत्र 2020-21 पर होगा। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में औसत अंक तभी मिलते हैं, जबकि कॉपी बाढ़, आगजनी या किसी आपदा में नष्ट हो गई हो। हालांकि कोरोना भी महामारी के रूप में आपदा है। स्थिति सामान्य होने पर परीक्षाएं चाहें तो जुलाई-अगस्त भी कराई जा सकती हैं।
डॉ. जगराम मीणा, पूर्व परीक्षा नियंत्रक मदस विश्वविद्यालय

कब-कब हुई देरी से परीक्षा
-वर्ष 1982 में छात्रों की मांग पर अप्रेल में राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराए गए। तब मौजूदा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे। चुनाव के चलते अगस्त तक परीक्षाएं करानी पड़ीं थी।
-2017 में चेन्नई में नवंबर-दिसंबर में बाढ़ के चलते स्कूल-कॉलेज-विश्वविद्यालय की परीक्षाएंं देरी से हुई।
-2018 में फरवरी-मार्च में जाट आरक्षण आंदोलन के चलते हरियाणा के बोर्ड और विश्वविद्यालयों में विलंब
-2008 में मई-जून में राजस्थान के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के चलते विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में विलंब
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