
भीषण गर्मी में जहां रेत के समंदर में बवंडर उठ कर खौफनाक मंजर पेश कर देते हैं वहीं सर्दियों में चलने वाली शीतल मंद बयार से रेत पानी की तरह बह कर मन को सुकून पहुंचाती है। पुष्कर के दड़ों में झर-झर बहती रेत को देखकर झरने फूटने का सा एहसास होता है। जय माखीजा


