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उड़ाने वालों की ही इच्छा, कट जाए पतंग

...ताकि सड़कों-छतों तक पहुंच जाए ये संदेश कि कैंसर नहीं है असाध्य रोग - कैंसर पर विजय पाने वाले बच्चों ने पतंगबाजी कर फैलाई जागरुकता

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kite,  cancer awareness

Children and their parents with kites

अहमदाबाद. आमतौर पर पतंग उड़ाने वाला यह नहीं चाहता है कि उसकी पतंग कट जाए। इसके विपरीत शनिवार को शहर के वासणा क्षेत्र में इस उद्देश्य से पतंग वितरित की गईं कि ये सभी पतंग कट कर जाएं। दरअसल, इन पतंगों पर कैंसर रोग की जागरुकता के संदेश लिखे हुए हैं और ये पतंग जहां भी गिरे वहां यह संदेश फैलाएं कि कैंसर रोग का उपचार संभव है।
वासणा क्षेत्र स्थित गुजरात कैंसर सोसायटी (जीसीएस) संचालित कंम्युनिटी ऑन्कोलोजी सेंटर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शनिवार को कैंसर पर विजय पाने वाले बच्चों ने पतंग उड़ाईं। इसका उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना है। उत्तरायण के मौके पांच हजार से अधिक पतंग और मांझा वितरित करने वाले इकबालभाई बताते हैं कि इन पतंगों पर कैंसर को लेकर जागरुकता भरे संदेश हैं। इन्हें उड़ाने वाला यही इच्छा रखता है कि यह पतंग कट कर गिरे और संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। कैंसर का नाम आते ही मरीज और परिजन काफी घबरा जाते हैं। आज के जमाने में कई नई तकनीकी आई है जिससे कैंसर का इलाज संभव है। यह तभी हो सकता है जब समय रहते निदान और उपचार किया जाए। जीसीएस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. गीता जोशी ने बताया कि कैंसर जागरुकता के लिए यह सेंटर लंबे समय से कार्यकर रहा है। यहां न केवल जांचे होती हैं बल्कि उन मरीजों को भी रहने की सुविधा है जिनका उपचार संभव नहीं है लेकिन उनके शेष जीवन को अच्छा बनाया जा सकता है। जीसीएस के सचिव क्षितिज मदनमोहन ने कहा कि सेंटर में ऑटो-एनलाइजर, मेमोग्राफी, एक्सरे, सोनोग्राफी, पेप स्मीयर, एफएनएसी तथा ईसीजी जैसी सुविधाएं हैं। जीसीआरआई अस्पताल के निदेशक डॉ. आर.के. व्यास एवं जीसीएस के महासचिव प्रशांत किनारी वाला के अनुसार पिछले पच्चीस वर्ष से हेल्थ चेकअप की सुविधा है जिससे बहुतकम दामों में लोगों को लाभ मिल रहा है। जीसीआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. पंकज शाह एवं डॉ. शिलिन शाह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।