
पाटण. श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने कच्छ जिले का प्रवास पूरा कर गुरुवार को पाटण जिले में प्रवेश किया।
आचार्य ने लगभग ढाई महीने तक गुजरात के सबसे बड़े जिले कच्छ में विहार-प्रवास पूरा कर गुरुवार सुबह कच्छ जिले के आडेसर से प्रस्थान किया। वे लगभग 9 किलोमीटर का विहार का पाटण जिले के पिपरला गांव में स्थित श्री वीर डांगर दगायचा दादा अतिथि भवन पहुंचे। वहां ये लगभग 7 किलोमीटर का विहार कर रोजू में स्थित अमृत कलापूर्ण तीर्थ विहार धाम पहुंचे। इस तरह आचार्य ने बढ़ती गर्मी और धूप के बीच गुरुवार को कुल लगभग 16 किलोमीटर का विहार किया।
रोजू गांव में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि 84 लाख जीव योनियों में मानव जन्म दुर्लभ है और वर्तमान में यह जन्म हम सभी को प्राप्त है। गृहस्थ जीवन में भी मानव जन्म को जितना संभव हो सके, सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए। जितना संभव हो सके, धर्म, ध्यान, भक्ति आदि करने का प्रयास करना चाहिए। तीर्थंकर के प्रति श्रद्धा हो, गुरु की पर्युपासना करनी चाहिए।
जहां तक संभव हो गुरु की उपासना का लाभ प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में दया, अहिंसा, अनुकंपा की भावना को रखने का प्रयास करना चाहिए। जितना संभव हो सके, जीवों के प्रति दया, अनुकंपा की भावना हो। जरूरतमंदों को भी दान दिया जा सकता है। गुणों के प्रति अनुराग की भावना हो। जहां से भी ज्ञान मिले, वहां से ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए।
जीवन में जहां तक संभव हो, संयम भी रखने का प्रयास करना चाहिए। शास्त्रों की वाणी कानों में पड़े, ऐसा प्रयास करना चाहिए। भगवान, अर्हतों की भक्ति, गुरु की उपासना, गुणों के प्रति अनुराग, दान दें और आगम वाणी का श्रवण करें तो मानव का मानव जीवन सफल, सुफल हो सकता है।
Published on:
03 Apr 2025 10:20 pm
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