पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित कवि गोपालदास नीरज अपने जीवन के अंतिम दिनों में काफी व्यथित थे। अपने गीतों से लोगों के दिलों में राज करने वाले नीरज के दिल में जीने की इच्छा खत्म हो चुकी थी। इसके लिए उन्होंने अपनी इच्छा मृत्यु की मांग की थी। 11 जुलाई 2018 को गोपालदास नीरज द्वारा एक पत्र जिलाधिकारी अलीगढ़ के लिए लिखा गया पत्र इस बात का खुलासा करता है। पत्र में जो बातें लिखी हैं वह कुछ इस तरह हैं। गोपालदास नीरज ने लिखा है कि कुछ दिनों पूर्व उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि जिन लोगों को शारीरिक पीड़ा के कारण असमर्थता प्राप्त हो जाती है वे लोग स्वेच्छया मृत्युवरण कर सकते हैं। मेरा स्वास्थ्य एवं शरीर अब इस योग्य नहीं है कि कुछ भी कर सके। इसलिए जो शरीर मेरे लिए अब बोझ बन गया है उसे मैं मुक्त होना चाहता हूं। अतः आपसे निवेदन कर रहा हूं कि मुझे स्वेच्छया मृत्युवरण के लिए हेलीडेथ इंजेक्शन को प्राप्त करवाने की कृपा करें। गोपालदास नीरज द्वारा यह पत्र उनके लेटर हेड पर लिखा गया है जिसमें उनका पता जनकपुरी मैरिज रोड अलीगढ़ दर्ज है।
इस पत्र के सामने आने से परिवार के सभी लोग हैरान हैं। आपको बता दें कि जीवन के अंतिम दिनों में गोपालदास नीरज आगरा के सरस्वती नगर आवास पर ठहरे हुए थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया तो एक स्थानीय अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। जहां से उपचार के लिए उन्हें एम्स में भेजा गया था। एम्स में गोपालदास नीरज की हालत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया। शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि वे अपनी देह दान कर चुके थे लेकिन, उनका शरीर ऐसा नहीं था जो मेडिकल कॉलेज में छात्रों के काम आ सके। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम समय में उनका बेटा अरस्तू प्रभाकर साथ था। जब अरस्तू प्रभाकर से इच्छा मृत्यु के पत्र के संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि अंतिम समय में उनकी इच्छा मुरैना में रहने की थी। वे एम्स नहीं जाना चाहते थे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि ऐसा पत्र भी है। जो व्यक्ति इस कदर जुझारू था, वो ऐसा पत्र नहीं लिख सकता है।
हेलीडेथ में घातक या जहरीला इंजेक्शन लगाकर मौत दी जाती है। बता दें कि इस वर्ष मार्च में ही सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। इसे पैसिव यूथेनेशिया भी कहा जाता है। ऐसे मरीज जो कभी ना ठीक हो पाने वाली बीमारी से पीड़ित हैं और घोर पीड़ा में जीवन काट रहे हैं। कोर्ट ने उन्हें सम्मान के साथ अपना जीवन खत्म करने की अनुमति दी है।