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विनीत चौहान की ये कविता आपके रोंगटे खड़े कर देगी

वीर रस के कवि विनीत चौहान जब मंच पर आते हैं तो मानो उत्साह की तूफान आ जाता है। श्रोताओं का भुजाएं फड़कने लगती हैं।

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कवि सम्मेलन

कवि सम्मेलन

आगरा। वीर रस के कवि विनीत चौहान जब मंच पर आते हैं तो मानो उत्साह की तूफान आ जाता है। श्रोताओं का भुजाएं फड़कने लगती हैं। नेत्र सजल हो जाते हैं। अपनी थाती पर गर्व की अनुभूति होती है। यू ट्यूब चैनल फन्नी ढाबा के उद्घाटन के मौके पर हुए कवि सम्मेलन में विनीत चौहान ने राजस्थान के वीरों पर केन्द्रित ऐसी कविता सुनाई कि श्रोताओं को रोंगटे खड़े हो गए। यह कार्यक्रम पश्चिमपुरी, सिकंदरा स्थित शिव पैलेस में हुआ। यह कार्यक्रम संयोजक और व्यंग्यकार डॉ. अनुज त्यागी ने किया था।

राजस्थान के वीरों की गाथा

विनीत चौहान ने कविता की भूमिका में बताया कि राणा उदय सिंह की सेना में सबसे आगे चूड़ावत रहा करते थे। सबसे आगे रहकर प्राणोत्सर्ग करने का पहला अवसर होता था। यह गर्व की बात होती थी। शक्तावत चाहते थे कि सबसे आगे रहने का गौरव उन्हें दिया जाए। महाराणा उदय सिंह के सामने यह बात रखी गई। महाराणा ने कहा कि मुगलों के अधीन किले में जो सबसे पहले प्रवेश करेगा, वही सेना में सबसे आगे रहेगा। इसके लिए भीषण युद्ध हुआ। किले का द्वार तोड़ने के लिए शक्तावत हाथी के मस्तक के सामने आ गया, ताकि द्वार पर लगी कीलें हाथी को न लगें। चूड़ावत दीवार के सहारे ऊपर चढ़ रहे थे। उन्हें गोली लगी और नीचे गिर गए। जब उन्होंने देखा कि शक्तावत हाथी के माध्यम से किले का द्वार तोड़कर अंदर जाने वाले हैं, तो चूड़ावत ने अपना सिर काटकर किले में फेंक दिया। उस समय मृत्यु भी असमंजस में थी कि पहले किसका वरण करूं। पूरी कविता सुनने के लिए देखें यह वीडियो-

अलवर के रहने वाले

कवि विनीत चौहान मूलरूप से अलवर (राजस्थान) के रहने वाले हैं। पूरे देश में उन्हें काव्यपाठ के लिए बुलाया जाता है। कश्मीर औऱ सेना पर केन्द्रित उनकी कविताएं अत्यधिक सराही जाती हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें राष्ट्र गौरव और दिल्ली सरकार ने राष्ट्र चारण सम्मान से नवाजा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के हाथों भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनके नाम हैं- गर्जन गुंजन, अग्नि मंथ, स्वर अहसास के। कई देशों में जा चुके विनीत चौहान को दिल्ली के लाल किले से भी काव्यपाठ का अवसर मिल चुका है।