सागर. रहली विधानसभा के 9 बार के विधायक व पूर्व मंत्री भार्गव गोपाल की सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट चर्चाओं में आ गई है। बीते दिन उन्होंने अपने ऑफिशियल फेसबुक एकाउंट से एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने झकझोर देने वाला मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। गांव से लेकर शहर तक जगह-जगह देवी जी सहित कन्याओं का पूजन हो रहा है। पांच दिन बाद दशहरा आएगा। देश भर में गांव से लेकर शहरों तक लोग रावण का पुतला दहन करेंगे। आजकल जहां अखबारों में एक तरफ दुर्गा पूजन और कन्या पूजन की खबरें छपती हैं, उसी पेज के दूसरी तरफ 3 वर्ष, 5 वर्ष की अबोध बालिकाओं के साथ दुष्कृत्य व उनकी हत्या करने की खबरें भी निरंतर पढऩे और देखने में आती हैं। मैंने यह भी गौर किया है कि दुनिया के किसी भी देश में मुझे ऐसे समाचार पढऩे या देखने नहीं मिले। नवरात्रि के महापर्व में हमें अब यह विचार करना होगा कि क्या हम लंकाधिपति रावण का पुतला जलाने की पात्रता रखते हैं? और क्या हम इसके अधिकारी हैं?
जिनका चरित्र पूरा गांव जानता है, उनका रावण दहन करने का औचित्य क्या – भार्गव
पोस्ट में पूर्व मंत्री भार्गव ने कहा कि विजयादशमी को हम बुराई पर अच्छाई की विजय का त्योहार मानते हैं। रावण ने सीता माता का हरण किया लेकिन सीता जी की असहाय स्थिति में भी उनका स्पर्श करने का प्रयास नहीं किया। सभी प्रकार की रामायणों में उल्लेख है कि रावण से बड़ा महाज्ञानी, महातपस्वी, महान साधक और शिवभक्त भूलोक में नहीं हुआ, जिसने अपने शीश काट काटकर भगवान के श्री चरणों मे अर्पित किए। ऐसे में आजकल ऐसे लोगों के द्वारा जिन्हें न किसी विद्या का ज्ञान है, जिन्हें शिव स्तुति की एक लाइन और रुद्राष्टक, शिवतांडव का एक श्लोक तक नहीं आता, जिनका चरित्र उनका मुहल्ला ही नहीं बल्कि पूरा गांव जानता है, उनके रावण दहन करने का क्या औचित्य है? हम सबसे पहले इस बात का प्रण लें कि हमें अपने मन के अंदर और अपनी इंद्रियों में बैठे उस रावण को मारना होगा जो तीन और पांच वर्ष तक की अबोध बच्चियों के साथ दुष्कृत्य करने को प्रेरित करता है। हम सभी भारतीयों के लिए यह आत्ममंथन का विषय है।