scriptराजनाथ सिंह तय करेंगे कौन बनेगा का लोकसभा अध्यक्ष? PM Modi ने सर्वसम्मति बनाने को सौंपी जिम्मेंदारी… | Will Rajnath Singh decide who will become the Speaker of Lok Sabha? PM Modi has given the responsibility to create consensus… Know 7 names including Rajasthan who can become the Speaker? | Patrika News
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राजनाथ सिंह तय करेंगे कौन बनेगा का लोकसभा अध्यक्ष? PM Modi ने सर्वसम्मति बनाने को सौंपी जिम्मेंदारी…

Who Become Loksabha President: स्पीकर और संसद सत्र के अन्य मसलों पर चर्चा के लिए इसी सप्ताह एनडीए की बैठक हो सकती है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल में पुराने चेहरों को महत्व दिया है, उस लिहाज से स्पीकर ओम बिरला को फिर से मौका दिया जा सकता है। रविवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की बिरला से मुलाकात को भी इससे जोड़ कर देखा जा रहा है।

नई दिल्लीJun 19, 2024 / 06:19 am

Anand Mani Tripathi

भाजपा ने एक बार फिर सर्वसम्मति से लोकसभा स्पीकर के चयन के लिए कवायद तेज कर दी है। सहयोगी दलों से बातचीत और विपक्ष को भी सर्वसम्मत स्पीकर के लिए राजी करने की कमान वरिष्ठ भाजपा नेता और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है। नई लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शूरू होगा और स्पीकर का चुनाव 26 जून को होगा। लोकसभा के इतिहास में अभी तक सर्वसम्मति से ही स्पीकर बनते आए हैं।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा में बदले हुए संख्या बल की स्थिति में स्पीकर का पद भाजपा अपने पास रखेगी और एनडीए गठबंधन सहयोगियों को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं है।भाजपा चाहती है कि उसके स्पीकर के नाम पर विपक्षी दल भी राजी हों और चुनाव की नौबत नहीं आए। राजनाथ सिंह सहयोगी दलों से लेकर विपक्ष के नेताओं से भी संवाद में कौशल में माहिर माने जाते हैं। लोकसभा स्पीकर के लिए आम सहमति बनाने में भाजपा उनके अनुभव का लाभ उठाना चाहती है इसलिए उन्हें यह टास्क सौंपा गया है।
ओम बिड़ला को फिर से बनाया जा सकता है अध्यक्ष
स्पीकर और संसद सत्र के अन्य मसलों पर चर्चा के लिए इसी सप्ताह एनडीए की बैठक हो सकती है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल में पुराने चेहरों को महत्व दिया है, उस लिहाज से स्पीकर ओम बिरला को फिर से मौका दिया जा सकता है। रविवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की बिरला से मुलाकात को भी इससे जोड़ कर देखा जा रहा है।
Birla
अभिभाषण पर मंथन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर मंगलवार की सायं 5.30 बजे से मैराथन बैठक हुई। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, मनोहर लाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव के साथ एनडीए सहयोगी दलों से चिराग पासवान, लल्लन सिंह भी इस बैठक में शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में संसद सत्र की तैयारियों और राष्ट्रपति के अभिभाषण से जुड़े मुद्दों पर मंथन हुआ।
अभिनंदन यात्रा निकालेगी बीजेपी
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद सभी मंत्री और सांसद अपने क्षेत्र में जाकर मतदाताओं का अभिनंदन कार्यक्रम करेंगे। बीजेपी ने इसके लिए बड़ा प्लान बनाया है। पार्टी का मानना है कि जीते जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में जाकर छोटी सभाएं और रैलियां, पदयात्रा करने से जनता से जुड़ाव होगा।
जानिए कौन बन सकता है अध्यक्ष

मोदी के दौर वाली भाजपा में कौन क्या बनने वाला है, सही अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ समीकरणों के आधार पर कई नामों की चर्चा चल रही है…
1- देवेंद्र फडणवीसः भाजपा की सेकंड लाइन में संभावनाओं से भरे नेता माने जाते हैं संघ पृष्ठिभूमि के 53 वर्षीय देवेंद्र फडणवीस। प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री दोनों रहते हुए संगठन और सरकार चलाने का कौशल है। पार्टी इन्हें लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान प्रभारी बनाती रही है। महाराष्ट्र में जिस तरह से नए समीकरण उभरे हैं, उससे इन्हें राज्य से हटाकर राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी मौका दिया जा सकता है।
2- विनोद तावड़ेः महाराष्ट्र में जिस तरह से भाजपा के सामने मराठा राजनीति को साधने की चुनौती है, उसमें 62 वर्षीय विनोद तावड़े को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी संदेश दे सकती है। संघ के छात्र संगठन एबीवीपी से निकले तावड़े मुंबई प्रदेश इकाई अध्यक्ष से लेकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री तक रह चुके हैं। इस समय बतौर महासचिव दूसरे दलों के नेताओं की भर्ती से लेकर कई बड़े अभियान देख रहे।
3- सुनील बंसलः राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान निवासी 54 वर्षीय सुनील बंसल की गिनती भाजपा के परफॉर्मर नेताओं में होती है। संघ पृष्ठिभूमि के बंसल के ओडिशा और तेलंगाना का प्रभारी रहते भाजपा ने दोनों राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया। इसके पूर्व यूपी में संगठन मंत्री रहते हुए 2014, 2017, 2019 और 2022 का चुनाव जिता चुके हैं। बंसल का ट्रैक रेकॉर्ड उन्हें अध्यक्ष पद का दावेदार बनाता है।
4- के लक्ष्मणः तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और इस समय ओबीसी मोर्चा की कमान संभाल रहे हैं। संसदीय और केंद्रीय चुनाव जैसी ताकतवर समितियों में सदस्य होने की वजह से मजबूत व्यक्ति हैं। लक्ष्मण को बनाने से भाजपा न केवल दक्षिण भारत को बल्कि ओबीसी को भी साध सकती है। तेलंगाना में भाजपा की इस बार कांग्रेस से ज्यादा लोकसभा सीटें आईं हैं। राज्य के खाते में अध्यक्ष का पद डाला जा सकता है।
5- अनुराग ठाकुरः केंद्रीय मंत्रिमंडल से अप्रत्याशित रूप से बाहर होने के बाद अनुराग ठाकुर का नाम भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चर्चा में है। अनुराग की युवाओं में अच्छी लोकप्रियता है। लोकसभा चुनाव में जिस तरह से युवाओं की नाराजगी बड़ा मुद्दा बनी, उससे उनके चेहरे को आगे कर पार्टी युवाओं को आकर्षित कर सकती है। लेकिन, नड्डा के बाद दूसरा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हिमाचल से होगा, इस पर संशय है।
6- ओम माथुर और नरेंद्र सिंह तोमरः ओम माथुर और नरेंद्र सिंह तोमर दोनों भाजपा के बेहद वरिष्ठ नेता हैं और संगठन कौशल में माहिर माने जाते हैं। माथुर यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ से लेकर कई राज्यों में पार्टी की सरकारें बनवा चुके हैं। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह में माथुर की 72 साल की उम्र रोड़ा है। केंद्र से राज्य की राजनीति में बतौर स्पीकर भेजे गए नरेंद्र सिंह तोमर फिर से राष्ट्रीय राजनीति में आएंगे, यह बड़ा सवाल है।
ये नाम भी चर्चा में
यों तो संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश का भी नाम चर्चा में है। लेकिन ये तीनों प्रचारक संघ के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। संगठन महामंत्रियों को अध्यक्ष बनाने का कोई उदाहरण नहीं है। क्योंकि, रामलाल की तरह संघ आवश्यकता के अनुरूप प्रचारकों को वापस बुला लेता है। भाजपा अगर महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय लेती है तो फिर तेलंगाना से डी पुरुंदेश्वरी, हरियाणा से सुधा यादव, तमिलनाडु से वनिथि श्रीनिवाससन, छत्तीसगढ़ की सरोज पांडेय की भी दावेदारी बनती है।
कौन-सा फॉर्मूला चलेगाः अटकलें जारी

फॉर्मूला 1- चूंकि केंद्र में सरकार की कमान ओबीसी चेहरे के हाथ है तो पार्टी की कमान कोर वोटर माने जाने वाले सामान्य वर्ग को मिलने की ज्यादा संभावना है।
फॉर्मूला 2-राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले अमित शाह और जेपी नड्डा राष्ट्रीय महासचिव रहकर अनुभव अर्जित कर चुके थे। यह फॉर्मूला चला तो किसी महासचिव को ही मौका मिलेगा।

फॉर्मूला 3-लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बाद यदि पार्टी दलित या ओबीसी समुदाय को साधना चाहेगी तो इस वर्ग से कोई चेहरा हो सकता है।
फॉर्मूला 4- जिस तरह से लोकसभा चुनाव में दक्षिण में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है तो तो पार्टी यहां से किसी चेहरे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बड़े संदेश दे सकती है।

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