बेसमेंट निर्माण में गड़बड़ी ऑडिटोरियम के बेसमेंट निर्माण के लिए न्यास ने 3 फरवरी 2003 को निविदा जारी की। काम 26 नवंबर को पूरा होना था जो 15 अप्रेल 2004 को पूरा हुआ। बेसमेंट निर्माण अधीक्षण अभियन्ता द्वितीय विनोद विरमानी, अधीक्षण अभियन्ता तृतीय डीएल भाखर, अधिशासी अभियन्ता टीसी डाबी, अरुण मेहता, सहायक अभियन्ता डीएल बाफना तथा कनिष्ठ अभियन्ता आरपी शर्मा की निगरानी में हुआ था। निर्माण के कुछ माह बाद बारिश में पानी की आवक शुरू हो गई थी, जो अब भी जारी है। पानी रोकने को दो बार निर्माण करवाया। कार्य घटिया होने के बाद एसीबी ने अधिशासी अभियन्ता एसएस गंभीर व रविंद्र प्रकाश माथुर को आरोपी बनाया। ये दोनों ने न्यास में बेसमेंट का काम पूरा होने के दो वर्ष बाद 19 सितंबर 2006 व 14 सितंबर 2006 को कार्य भार ग्रहण किया था।
एसीबी ने मांगे दस्तावेज एसी व कुर्सियों की क्वालिटी कथित तौर पर खराब होने के मामले में एसीबी में दर्ज परिवाद की जांच के तहत एएसपी ब्रजराज सिंह ने ऑडिटोरियम निर्माण व उद्घाटन से वर्ष-2015 तक के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए यूआईटी सचिव को पत्र लिखा। इसमें निर्माण एजेंसी आवास विकास लिमिटेड को जारी कार्य आदेश, एग्रीमेन्ट व संस्था को भुगतान व कंसलटेंसी एजेंसी मैसर्स बहल जोशी एंड कम्पनी को अधिकृत करने का कार्यादेश, एग्रीमेन्ट व भुगतान की प्रमाणित पत्रावली तलब की। एसीबी ने वर्ष-2015 तक एसी के संबंध में प्राप्त शिकायत व उसके निस्तारण के दस्तावेज, एसी का काम करवाने के सम्बन्ध में कंसलटेंट की ओर से किए निरीक्षण व उसकी रिपोर्ट मांगी। वर्ष-2015 तक एसी की बुकिंग व प्राप्त किराया राशि का विवरण भी मांगा। पत्र में बताया कि ऑडिटोरियम में प्लास्टिक की कुर्सियां लगवाई, जिसमें आयोजन पार्टी ने कब-कब कितनी कुर्सियां तोड़ी। उनसे कितनी राशि न्यास में जमा कराई। न्यास ने यह जानकारी एसीबी को नहीं दी है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी मूल फाइल एसीबी के पास है।