मुजफ्फरनगर। बिहार के औरंगाबाद में सोमवार को नक्सलियों से लोहा लेते हुए मुजफ्फरनगर का जांबाज कमांडो हरविंदर पंवार शहीद हो गया है। हरविंदर के शहीद होने की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
बता दें कि सोमवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान आईईडी ब्लास्ट में 12 सीआरपीएफ कमांडो शहीद हो गए थे। ये सभी कमांडो 205 कोबरा बटालियन के थे। इस मुठभेड़ के दौरान 4 माओवादी भी मारे गए। वहीं इस मुठभेड़ में पांच सीआरपीएफ के जवान घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं शहादत के बाद पूरा गांव सीएम अखिलेश यादव से नाराज है।
घर वालों का रो—रो कर बुरा हाल
दरअसल औरंगाबाद के सोनदाहा में 205 कोबरा बटालियन के जवानों और नक्सलियों के बीच सोमवार दोपहर में मुठभेड़ शुरू हुई। इस दौरान कोबरा बटालियन के 12 जवान मुठभेड़ में शहीद हो गए और पांच जवान गम्भीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। शहीद होने वाले जांबाजो में एक जांबाज मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील के गांव जड़वड़ कटिया का निवासी हरविंदर था। जैसे ही हरविंदर के शहीद होने की खबर गांव में पहुंची तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिवार वालों का रो—रो कर बुरा हाल हो है।
एसआई बनना चाहता था हरविंदर
जांबाज के पिता भीष्म का कहना है की मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। सुबह साढे 9 बजे सूचना आई थी की नक्सलियों से मुठभेड़ में बेटा शहीद हो गया है। हरविंदर जून में ही छुट्टी काट कर वापसी गया था। पिता ने बताया कि हरविंदर इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही सेना में भर्ती हो गया था। वह कोबरा बटालियन में एसआई बनने की तैयारी कर रहा था।
भाई से कहता था, माओवादियों से नहीं हुआ मुकाबला
शहीद के भाई बिजेंद्र ने बताया की मेरे पास कहने को कुछ नहीं है, मेरा भाई चला गया मैं कुछ नहीं कह सकता हूं, वो 2010 में भर्ती हुए थे। बिजेंद्र ने कहा कि, भाईया अकसर कहते थे कि मेरा माओवादियों से मुकाबला नहीं हुआ है, इस बार हुआ तो ऐसा हुआ कि हमें छोड़कर ही चले गए। बिजेंद्र का सरकार से कहना है कि, या तो सरकार आॅपरेशन न चलाए और अगर चलाती है तो सैनिकों को पूरी छूट दी जाए ताकि वह दुश्मनों को खत्म कर सकें।
अखिलेश से नाराज गांव वाले
हरविंदर की शहादत के बाद गांव वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी नाराज हैं। उनका कहना है कि अखिलेश मंगलवार को मुजफ्फरनगर तक आए लेकिन न तो उनके परिवार से मिले न ही मंच से शहीद की याद में कुछ कहा। मृतक के रिश्तेदारों का कहना है कि केंद्र सरकार को कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जिससे जवानों को सुरक्षा मिले और जवान शहीद न हो इस तरह की रणनीति बनाई जाये।