
मोदी सरकार नहीं कर पाई तो कोई नहीं कर पाएगा
पत्र ने कहा, “नेताजी की मौत के रहस्य का समाधान करने के लिए अगर यह साहसिक कदम नरेंद्र मोदी सरकार ने नहीं उठाया तो मेरा मानना है कि कोई और भविष्य में ऎसा नहीं कर पाएगा और नेताजी का रहस्य हमेशा के लिए रहस्य बनकर रह जाएगा।” यह लेख नेताजी से संबंधित दस्तावेज को ममता बनर्जी सरकार द्वारा सार्वजनिक करने के बाद आया है। इसमें दावा किया गया है कि इसने नेताजी की मौत से जुड़ी बातों की छिपाने के संदेह और उनके परिवार के सदस्यों की जासूसी की शर्मनाक साजिश की पुष्टि की है। लेख मे कहा गया है कि सरकार को इस बात की जांच करनी चाहिए कि नेताजी की मौत कहां हुई। इससे सच सामने आ जाएगा। इसमें कहा गया है कि नेताजी अपने क्रांतिकारी उत्साह और अपने अंतरराष्ट्रीय कद की वजह से लोगों में स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान नेहरू से कहीं अधिक लोकप्रिय थे।

दान में मिला धन कहां गया?
लेख में सवाल किया गया है कि नेताजी और आईएनए का धन आखिर कहां गया। नेताजी सिंगापुर लॉर्ड माउन्टबेटन के अनुरोध की वजह से गए और बैंक के अधिकारियों से मुलाकात की। लेकिन वह क्यों अब भी रहस्य है। नेताजी को जो धन और गहने दक्षिण पूर्वी एशिया में रहने वाले हजारों भारतीयों ने दान किए थे, उसके बारे में भी सूचना हासिल करनी चाहिए। अखबार ने लिखा है, “उन्होंने निर्वासन में भारत की प्रथम स्वतंत्र सरकार का गठन किया था जिसे 11 देशों ने मान्यता दी थी। दुर्भाग्य से, इस इतिहास को स्वतंत्रता के बाद के नेतृत्व ने हमारी स्मृति से जानबूझकर मिटा दिया।”

परिवार की जासूसी
अखबार ने लिखा कि यह दुखद है कि जिस व्यक्ति ने स्वतंत्रता के लिए भारतीयों का खून मांगा, वह खुद अपनी आखिरी सांस अपनी मातृभूमि पर नहीं ले सका। उसके परिवार की जासूसी की गई और उनके सहायकों को स्वतंत्र भारत में अपराधी माना गया। नेताजी पर फाइलों को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सार्वजनिक करने से नेताजी की मौत के इर्द-गिर्द लीपापोती के बारे में संदेह और उनके परिवार के सदस्यों की शर्मनाक जासूसी की पुष्टि होती है।
अब आप पा सकते हैं अपनी सिटी की हर खबर ईमेल पर भी – यहाँ क्लिक करें