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इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए नासा बना रहा है डीप स्पेस हैबिटैट 

नासा के वैज्ञानिक एक ऐसे डीप स्पेस हैबिटैट (डीएसएच) का निर्माण कर रहे है, जिसके जरिये अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय के लिए अंतरिक्ष में भेजना संभव हो सकता है। खगोलीय अन्वेषण के लिहाज से भी अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

Aug 01, 2017 / 12:20 pm

Dhirendra

nasa  deep space habitat project to make astronaut

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फिलहाल नासा के वैज्ञानिक डीएसएच का प्रोटोटाइप बनाने के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के पुराने कार्गों व अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करेंगे। नासा के वैज्ञानिक डीएसएच बनाने में सफल होते हैं तो तय है कि अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर 60 से 500 दिनों तक के लिए अंतरिक्ष में ठहराया जा सकेगा। 


लॉकहीड मार्टिन बनाएगा डीएसएच 
डीएसएच का प्रोटोटाइप तैयार करने की जिम्मेदारी अमरीकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को दिया गया है। प्रोटोटाइप नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के स्पेस सेंटर में तैयार किया जाएगा। इसे तैयार करने में इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि अंतरिक्ष यात्री डीएसएच में रहकर सुरक्षित तरीके से अंतरिक्षयान का संचालन कर सकें। इसके लिए नासा ने लॉकहीड को नेक्स्ट स्पेस टेक्नोलॉजिज फॉर एक्सप्लोरेशन पार्टनरशिप (नेक्स्टस्टेप) हैबिटैट अध्ययन प्रोग्राम पर काम करने का अधिकार दे दिया है। प्रोग्राम से जुड़े वैज्ञानिक तैयार प्रारूप और डिजाइन को नए सिरे से रिशेप करेंगे और डीप स्पेस गेटवे से संबंधित जरूरी उपकरणों का निर्माण करेंगे। इस चरण में कंपनी जॉनसन स्पेस सेंटर के पास अगली पीढ़ी के डीप स्पेस विमानन का प्रयोगशाला भी तैयार करेगी। 


प्रोटोटाइप तैयार करना आसान नहीं
लॉॅकहीड मार्टिन नेक्स्टस्टेप प्रोग्राम के प्रबंधक बिल प्रैट का कहना है कि इस काम को हल्के में लेना आसान है, लेकिन इस काम के लिए चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को इस राह में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि पृथ्वी की कक्षा से बाहर आवासीय परिसरों का निर्माण करने के लिए वैज्ञानिकों को डिफरेंट माइंडसेट से काम करना होगा। यह मंगल अभियान जैसा ही अभियान है। इसलिए डीएसएच ऐसा होना चाहिए, जो अंतरिक्ष यात्रियों को हर पल सुरक्षित, स्वस्थ और उत्पादक बनाए रख सके। 


18 माह में काम पूरा करने का लक्ष्य
वैज्ञानिकों के सामने 18 महीने में मिशन को पूरा करने की चुनौती है। कंपनी के शोधकर्ताओं को नासा के साथ मिलकर काम करना होगा। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के संभावित जोखिम को ध्यान में रखकर उसका निदान करना होगा। 


मिशन की उपयोगिता 
खोजी दल को इस प्रयोग के बल पर अंतरिक्ष में लंबे समय के लिए भेजना संभव होगा। इससे खगोलीय अन्वेषण के काम को बढ़ावा मिल सकता है। लुनर स्पेस और पृथ्वी के करीब रहने वाले क्षुद्रग्रहों का पता लगाया जा सकता है।


पुराने कार्गो होगा इस्तेमाल 
डीप स्पेस हैबिटैट के निर्माण में आईएसएस के पुराने कार्गो, ओरिएन क्रू कैप्सूल और अन्य सपोर्टिव उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि आवासीय कार्गो को अंतरराष्ट्रीय डॉकिंग सिस्टम स्टैंडर्ड के अनुसार तैयार करना संभव हो सके। 


डीएसएच तैयार करने की चुनौती
डीप स्पेस हैबिटैट (डीएसएच) का प्रस्ताव वैचारिक डिजाइन के रूप में सबसे पहले 2012 में अमरीकी वैज्ञानिकों ने रखा था। प्रारंभिक चरण में अंतरिक्ष यात्रियों को दो महीने तक की सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य है तो दूसरे चरण में इसकी क्षमता बढ़ाकर 500 दिनों तक करने की है। इसका पहला चरण मार्च 2017 में समाप्त हुआ है। साथ ही प्रोटोटाइम की रूपरेखा तैयार करने में सफलता मिली। दूसरे चरण में डीएसएच तैयार करने की योजना है। 


चीन के छात्र भी जुटे हैं अनुसंधान में
इसी तरह का एक प्रयोग हाल ही में बीजिंग यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दूसरे ग्रह पर कम से कम २०० दिनों तक रहने शुरू किया है। 200 दिनों तक चलने वाले इस प्रयोग में देखा जाएगा कि इंसान को बिना सूर्य की किरणों के क्या परेशानी आती है और इसका निदान किस तरह किया जा सकता है। यह प्रयोग चंद्रमा या मंगल जैसे ग्रह पर पौधों से ऑक्सीजन पैदा करने व मूत्र को रीसाइक्लिंग कर पीने के पानी में बदलने मेें मदद करेगा।

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