नई दिल्ली। तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता को तो सब जानते हैं लेकिन उनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि वो कभी वकील बनना चाहती थीं लेकिन परिवार की मजबुरियों ने उन्हें फिल्मों में आने पर मजबूर कर दिया। दोनों ही क्षेत्रों में उनका सफर आसान नहीं रहा था। जब वो महज दो साल की थीं तो उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार की पूरी जायदाद उनकी सौतेली मां को मिल गई और उनकी मां दाने-दाने के लिए मोहताज हो गई।
जयललिता के परवरिश के लिए उनकी मां ने उन्हे अपनी बहन के पास बेंगलुरु भेज दिया और उनकी मां काम की तलाश में मैसूर से मद्रास चली गईं। इसके बाद स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने 1961 में ‘एपिसल’ नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में काम किया। मात्र 15 वर्ष की आयु में वे कन्नड़ फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी। कन्नड़ भाषा में उनकी पहली फिल्म ‘चिन्नाडा गोम्बे’ 1964 में प्रदर्शित हुई। उसके बाद उन्होने तमिल फिल्मों की ओर रुख किया। वे पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर भूमिका निभाई थी।
तमिल सिनेमा में उन्होंने जाने माने निर्देशक श्रीधर की फिल्म ‘वेन्नीरादई’ से अपना करियर शुरू किया और लगभग 300 फिल्मों में काम किया। अपनी दूसरी ही फिल्म में जयललिता को उस समय तमिल फिल्मों के चोटी के अभिनेता एमजी रामचंद्रन के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगु, कन्नड़, अंग्रेजी और हिन्दी फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने धर्मेंद्र सहित कई अभिनेताओं के साथ काम किया, किन्तु उनकी ज्यादातर फिल्में शिवाजी गणेशन और एमजी रामचंद्रन के साथ ही आईं। 1965 से 1972 के दौर में उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ की।
फिल्मी करियर के बाद उन्होने एम. जी. रामचंद्रन के साथ 1982 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में एमजीआर और जयललिता के संबंधों में भी बहुत उतार चढ़ाव आए। उन्होंने उन्हें पार्टी के प्रोपेगेंडा सचिव के साथ-साथ राज्यसभा का सदस्य भी बनाया लेकिन पार्टी में जयललिता का इतना विरोध हुआ कि एमजीआर को उन्हें प्रोपेगेंडा सचिव के पद से हटाना पड़ा। उन्होंने 1984 से 1989 के दौरान तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया।
जयललिता ने 1998 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को समर्थन दिया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनकी करुणानिधि सरकार को ब$र्खास्त करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। सन 2002 में जब आधी रात को करुणानिधि को जगा कर गिरफ्तार किया गया तो उन पर बदले की कार्रवाई करने का आरोप भी लगा।
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