ऐसे जानलेवा गड्ढे देखकर पीडब्ल्यूडी को भी आ गया पसीना, भरने से किए हाथ खड़े
प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है, इसका
प्रत्यक्ष उदाहरण एनएच 30 के बायपास निर्माण के मामले में देखने को मिल रहा
है।


Heavy potholes on the road of Bemetra
बेमेतरा. प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण एनएच 30 के बायपास निर्माण के मामले में देखने को मिल रहा है। वर्तमान में बायपास व एप्रोच मार्ग का निर्माण नहीं होने की स्थिति में शहर के भीतर सड़क के गड्ढे जानलेवा हो चुके हैं। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क को एनएच प्राधिकरण को हैंडओवर करने की बात कहकर मरम्मत से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों व नेताओं के आर्थिक हितों की भेंट चढ़ गया बायपास
गौरतलब हो कि करीब 260 करोड़ की लागत से सिमगा से चिल्फी तक एनएच 30 पर टूलेन सड़क का निर्माण हुआ है। इसके अंतर्गत चार किमी लंबे बायपास का निर्माण होना था, जो कुछ संबंधित अधिकारियों व नेताओं के आर्थिक हितों की भेंट चढ़ गया। एनएच बायपास के सर्वे में कुछ जनप्रतिनिधियों को लाभ पहुचाने के फेर में शहर के भीतर से होकर बायपास के गुजरने के साथ भूमि अधिग्रहण के लिए 140 करोड़ का मुआवजा तय किया गया।
इस भारी भरकम मुआवजे को देने से एनएच प्राधिकरण ने हाथ खड़े कर दिए। परिणाम स्वरूप एनएच बायपास का निर्माण अधर में लटका हुआ है। बायपास का निर्माण नहीं होने की स्थिति में शहर के भीतर सड़क को चौड़ाकर करीब 4 किमी एप्रोच मार्ग के निर्माण की बात कही गई थी। लेकिन इस पर भी पहल होती नहीं दिख रही हैं। इस संबंध में एनएच प्राधिकरण के स्थानीय अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। जहां उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
सड़क हादसों में इजाफा
एनएच व स्टेट बायपास का निर्माण नहीं होने की वजह से शहर के भीतर सड़क हादसों में वृद्धि देखी जा रही है। इस दौरान भारी मालवाहक वाहनों की चपेट में आकर कई लोगों की जान चली गई है। इसके बावजूद प्रशासन ने आंखे मूंद रखी है। ज्ञात हो कि दोनों बायपास निर्माण के लिए सर्वे के पश्चात् भूअर्जन प्रक्रियाधीन था, लेकिन भूअर्जन के लिए मुआवजा तय करने में हुई गड़बडिय़ों के परिणाम स्वरूप निर्माण एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए।
दिल्ली के अधिकारी देंगे जानकारी
भूअर्जन के लिए सर्वे रिपोर्ट बनाने के दौरान हुई विसंगतियों का परिणाम अब तक शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के भीतर से गुजरने वाले एप्रोच मार्ग के निर्माण को लेकर विभाग के एसडीओ घाटगे व सब इंजीनियर कवर ने जानकारी देने से हाथ खड़े करते हुए दिल्ली के अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कही। वहीं सड़क निर्माण के लिए बेेमेतरा क्षेत्र में काटे गए 1400 पेंड़ों के एवज में दोगुना पौधारोपण करने के साथ सुरक्षा घेरा बनाए जाने को लेकर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। स्पष्ट है कि एनएच के अधिकारी अपने कार्यों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
दिन-रात लगा रहता है भारी मालवाहकों का आना-जाना, अफसर कुछ सुनने तैयार नहीं
रायपुर मार्ग पर अशोका विहार कॉलोनी से लेकर कवर्धा मार्ग पर नवागढ़ तिराहा तक चार किमी एप्रोच मार्ग निर्माण की बात कही जा रही है। लेकिन इस मामले में स्थानीय अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं। सिमगा-कवर्धा मार्ग पर दिन-रात भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही लगी रहती है।
ऐसी स्थिति में संधारण के अभाव में चार किमी के इस एप्रोच मार्ग की स्थिति काफी खराब है। बारिश में पानी भरे होने की वजह से गड्ढे जानलेवा हो चुके हैं। ज्ञात हो कि करीब 4 साल पहले लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के गड्ढों की मरम्मत की गई थी। लेकिन वर्तमान में सड़क को एनएच प्राधिकरण को हैंडओवर करने के बाद लोक निर्माण विभाग ने सड़क के गड्ढे भरने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जनता के सामने विकट स्थिति बन गई हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है।
जिम्मेदारों ने ये कहा
इस संबंध में एनएच प्राधिकरण के एसडीओ श्री घाटगे ने कहा कि पौधारोपण व एप्रोच मार्ग निर्माण के संबंध में दिल्ली के अफसरों से जानकारी लें। जानकारी देने के लिए अधिकृत नही हूं। बेमेतरा विधायक अवधेश चंदेल ने कहा कि इस संबंध में एनएच प्राधिकरण के अधिकारियों से चर्चा नही हुई है।
मंत्री राजेश मूणत से बात हुई थी, जहां उन्होंने एप्रोच मार्ग निर्माण को गंभीरता से लेने की बात कही। कलक्टर कार्तिकेया गोयल ने कहा कि 20 जुलाई से वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया जाना है, निर्माण कंपनी को इस अभियान में शामिल कर तय शर्तो के तहत वृक्षारोपण कराया जाएगा।
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