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जयपुर

Video: 66 दिन बाद शेर ने ली ‘जंगली’ हवा में सांस

उदयपुर.खान महाघूस कांड : आठ आरोपितों में शामिल शेर खान के साथ चिन्टू भी जेल से आया बाहर, हाईकोर्ट से तीसरे दिन पहुंचा जमानती आदेश 

जयपुरNov 22, 2015 / 01:07 pm

खान महाघूसकांड के आरोपित खान उद्यमी शेर खान व धीेरेन्द्र उर्फ चिन्टू 66 दिन जेल की चारदीवारी में बंद रहने के बाद शनिवार को जमानत पर बाहर आए। खान ने बाहर आते ही अपनी पत्नी तमन्ना बेगम का हाथ थामा, दरगाह की चौखट पर सजदा किया और बोला-मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं। उसके रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों ने जेल परिसर के बाहर उसका फूल मालाओं से इस्तकबाल किया। खान जेल से सीधा कार में सवार होकर अपने पैतृक घर सावा (चित्तौडग़ढ़)रवाना हो गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शेर खान पुत्र गुलाब खान व चिन्टू उर्फ धीरेन्द्र को 16 सितम्बर को निलम्बित आईएएस (तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव-खान) अशोक सिंघवी सहित आठ जनों के साथ गिरफ्तार किया था। जेल में रहने के दौरान सभी आरोपितों की एसीबी न्यायालय उदयपुर में जमानत याचिका खारिज हो गई। चार्जशीट पेश होने के बाद शेर खान व चिन्टू की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में निर्मलजीत कौर की एकलपीठ न्यायालय में जमानत याचिका पेश की। न्याायलय ने सुनवाई के बाद सशर्त दोनों की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
दो-दो लाख रुपए के दो मुचलके : न्यायालय ने शेर खान व चिन्टू को दो-दो लाख रुपए के दो मुचलकों के आधार पर छोडऩे के आदेश दिए। तीसरे दिन हाईकोर्ट से आदेश पहुंचने के बाद एसीबी न्यायालय ने आवश्यक कार्रवाई के बाद रुक्का जारी किया। रुक्का जेल में पहुंचने के बाद ढाई बजे शेर खान को रिहा किया गया। इसके कुछ देर बाद चिन्टू को भी छोड़ दिया गया। हाईकोर्ट ने आरोपितों के पासपोर्ट न्यायायल में जमा करवाने के आदेश दिए। आरोपित बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ सकेंगे।
पत्नी का हाथ थाम उतरा जेल की सीढि़यां : हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद तीन दिन से शेर खान की राह देख रहे परिजन व अन्य लोग मालाएं लेकर पहले ही जेल परिसर के बाहर पहुंच गए। बीमारी के कारण कमजोर नजर आ रहे शेर खान ने बाहर आते ही अपनी पत्नी तमन्ना बेगम को बुलवाया। पत्नी का हाथ पकड़कर जेल की सीढि़यों से उतरा। जेल परिसर में बनी दरगाह पर सजदा करने के बाद कार में सवार होकर अपने गांव सावा रवाना हो गया। उसने कार में बैठे-बैठे ही लोगों से मालाएं लीं। शेर खान ने जेल से बाहर आते ही कार में ही संक्षिप्त बातचीत में कहा- ‘मैं जेल से बाहर आकर खुश हंू। ऊपर वाले पर पूरा यकीन था। मैं किसी भी षड्यंत्र के बारे में कुछ नहीं जानता हूं। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मेरे शुभचिन्तकों की दुआएं काम आईं और मैं उसी वजह से बाहर आ पाया।Ó


इन साक्ष्यों के आधार पर मिली जमानत : आरोपित शेर खान की ओर से अधिवक्ता फरजन्द अली व विनित माथुर ने बताया कि खान विभाग के अधिकारियों ने शेर खां की खदान की षड्यंत्रपूर्वक शिकायत करवाकर नोटिस दिया। वह कानूनी कार्रवाई नहीं कर सके इसके लिए हाईकोर्ट में केविएट पेश कर दी गई। बाद में रकम एेंठने की नीयत से घेराबंदी कर उस पर दबाव बनाया गया। इसके चलते शेर खान ने कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय राशि पहुंचाई। मामले में टेलीफोन कॉल में शेर खान की किसी भी सरकारी कर्मचारी के साथ वार्ता नहीं है। न हीं व स्वयं सरकारी कर्मचारी है। राशि की बरामदगी या किसी भी अन्य स्थान पर शेर खान व्यक्तिश: मौजूद नहीं है। उसे आपराधिक षड्यंत्र का भागी माना भी जाए तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा पांच वर्ष की है। मामले में अनुसंधान भी पूरा हो चुका है। शेर खान पर धारा 409 नहीं बनती है, अगर बनती भी है तो मामला विचाराधीन है। मामले में एेसा कोई साक्ष्य नहीं है, जो आरोपित अपने प्रभाव से मिटा सके। सभी साक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक डाटा या दस्तावेजी साक्ष्य है, जो पहले ही एसीबी ने ले लिए हैं। आरोपित चिन्टू निरमा कंपनी के मालिक केवीएस चौहान का नौकर था। मालिक के कहने पर वह सीए श्यामसुन्दर सिंघवी के घर पर बैग लेने गया था। बैग में क्या व कितनी राशि थी, उसे पता नहीं था। इसके अलावा आरोपितों से चिन्टू की कोई वार्ता नहीं हुई, न ही वह किसी षड्यंत्र में शामिल था।

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