सुनील रोहोकाले, सीईओ, एएसके ग्रुप
रियल एस्टेट में निवेश बाकी सभी निवेशों से कई मायनों में अलग है, क्योंकि घर या दुकान खरीदना एक बड़ा आर्थिक फैसला होता है, जिसमें कई बार जिंदगीभर की कमाई लगी होती है। इसलिए प्रॉपर्टी के संबंध में कोई भी फैसला लेते समय दिल के बजाए दिमाग के इस्तेमाल को तरजीह देनी चाहिए। बेमतलब की चमक-दमक और आकर्षण में उलझने के बजाए अपनी जरूरतों पर फोकस करने से ही अच्छा रिटर्न मिलना संभव है।
खरीदने से पहले तय करें प्राथमिकता
प्रॉपर्टी में निवेश से पहले तय करें कि आप वहां खुद रहना चाहते हैं या सिर्फ निवेश के लिए खरीदना चाहते हैं। यदि रहने के लिए खरीद रहे हैं तो लोकेशन और साइज पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसके अलावा अलग-अलग समय पर जाकर वहां कुछ वक्त बिताएं, इससे माहौल का सही अंदाजा लगेगा। यदि निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं तो ग्रोथ की संभावना का आकलन जरूर करें। इसके अलावा आवागमन की सुविधा, मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर और इससे संबंधित भविष्य की योजनाओं, रेंटल इनकम की संभावना, शॉपिंग मॉल्स, स्कूल आदि की उपलब्धता को महत्व देना चाहिए।
बुकिंग से पहले इन पर दें ध्यान
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले संबंधित बिल्डर का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड, निर्माण की गुणवत्ता, प्रोजेक्ट का लीगल क्लियरेंस आदि के संबंध पूरी रिसर्च करें।
प्रॉपर्टी में निवेश हमेशा फायदेमंद नहीं
मान लीजिए, आप 100 रु में कोई घर खरीद रहे हैं, इसमें से 20 रु आप बचत से लगाते हैं और 80 रु होम लोन से जुटाते हैं। ऐसे में यदि ब्याज दर 9 फीसदी है और प्रॉपर्टी की ग्रोथ रेट 10-12 फीसदी है, तो आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन यदि प्रॉपर्टी की ग्रोथ रेट ब्याज दरों की तुलना में कम है, तो निवेश पर नुकसान होना तय है।
अभी कीमतों में उछाल की संभावना कम
रियल एस्टेट से रिटर्न में लोन की ब्याज दरों, आसपास के इलाकों में रोजगार की संभावना और इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि का बेहद महत्व होता है। ऊंची ब्याज दरों, धीमी जीडीपी ग्रोथ आदि के चलते फिलहाल निकट भविष्य में कीमतों में ज्यादा उछाल आने की संभावना नहीं है। लेकिन यदि मुद्रास्फीति में गिरावट आती है और आर्थिक स्थितियां सुधरती हैं, तो रिटर्न अच्छा मिल सकता है।
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