नई दिल्ली। मौद्रिक नीति की समीक्षा 4 अक्टूबर को होने जा रही है। इसी बीच सरकार ने अकादमीयों से जुड़े तीन लोगों को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में सदस्य नियुक्त कर दिया है। इन सभी की नियुक्ति चार तक प्रभावी रहेगी। कमेटी में सरकार की ओर से भारतीय सांख्यिकी संस्थान के चेतन घाटे, दिल्ली
स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की पमी दुआ और आईआईएम अहमदाबाद के आर एच ढोलकिया सदस्य
होंगे। वहीं रिजर्व बैंक की ओर से गवर्नर उर्जित पटेल, मौद्रिक नीति विभाग
के प्रभारी डिप्टी गवर्नर आर गांधी और कार्यकारी निदेशक माइकल पात्रा
सदस्य होंगे. उर्जित पटेल कमेटी के मुखिया होंगे।
छह सदस्यों वाली समिति में सरकार और आरबीआई के तीन-तीन सदस्य होंगे। गवर्नर इसके प्रमुख होंगे। आरबीआई की तरफ से एक डिप्टी गवर्नर तथा एक और सदस्य होंगे। सभी सदस्यों को एक-एक वोट का अधिकार होगा। टाई हुआ तो गवर्नर एक और वोट डाल सकेंगे। मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा 4 अक्टूबर को होगी। उम्मीद है कि इसमें ब्याज दरों पर फैसला इस समिति की सलाह पर किया जाएगा।
एमपीसी सरकार द्वारा निर्धारित मुद्रास्फीति के लक्ष्य और उसे हासिल करने को ध्यान में रखकर नीतिगत दर स्थापित करने के बारे में फैसला करेगी। सरकार के साथ हुए समझौते के तहत रिजर्व बैंक खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने को प्रतिबद्ध है। केंद्रीय बैंक ने अगले वर्ष मार्च के लिए पांच प्रतिशत मुद्रास्फीति का लक्ष्य रखा है। एमपीसी के लिए नियमों के तहत प्रत्येक सदस्य का एक वोट होगा और अगर मामला बराबरी पर आता है तो रिजर्व बैंक के गवर्नर निर्णायक वोट देंगे। अब तक गवर्नर ही रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर अंतिम निर्णय लेता रहा है। समिति के सदस्यों की नियुक्ति चार साल के लिए होगी और वे पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे।
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