पुनर्जन्म की प्यास में कराहती यमुना

यमुना को यम की पुत्री माना गया है और पौराणिक कथाओं के अनुसार वह श्रीकृष्ण की चतुर्थ पत्नी भी हैं। ये भी कहा जाता रहा है कि यमुना के जल का एक आचमन ही भयमुक्त करने के लिए काफी है, लेकिन आज उसी नदी के जल पर कई तरह के संक्रमण और बीमारियों का भय मंडरा रहा है। गंगा-जमुनी संस्कृति की भाग्यविधाता रही यमुना आज अपने प्रदूषण की वजह दम तोड़ती नजर आ रही है। इसे प्रदूषण मुक्त कराने में जितनी आवाज जनता ने उठाई है, उतनी ही सुस्ती जनता द्वारा चुने गए नुमाइंदों ने दिखाई है। 1995 में यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर आज भी फैसला होना बाकी है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित "डैड रिवर" का दंश झेलने को विवश यमुना की कीर्ति को वापस लाने के लिए यमुना विकास प्राधिकरण का गठन हुआ था। इस प्राधिकरण ने करोड़ों रूपए नदी को प्रदूषण मुक्त कराने में लगा दिए, पर नतीजा सिफर रहा। सर्वोच्च न्यायालय ने 12000 करोड़ के इस बेहिसाब और बेनजीते खर्च पर अफसोस जताया था, क्योंकि इतना प्रयास करने के बाद भी यमुना, नदी से नाला बनती जा रही है।
टेम्स मॉडल?
लंदन में कार्ययोजनाओं के माध्यम से टेम्स नदी के मौजूदा अवजल शोधन संयंत्रों का पुनरूद्धार किया गया और अपविष्ट जल को नए मार्गो से मोड़ दिया गया
टेम्स नदी को भी 56 साल पहते "मृत" घोषित कर दिया गया था, लेकिन ब्रिटेन की राजधानी लंदन के तत्कालीन मेयरों ने इसके जीवनदायिनी दल को दूषित होने से बचाने लिए समय समय पर स्कीम्स जारी की, जिनमें वॉटर ट्रीटमेंट का सुधार तो शामिल था ही, साथ ही औद्योगिक कचरे को इस नदी के पानी में बहाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और इसका सख्ती के साथ आज भी पालन हो रहा है। टेम्स की सुंदरता और जैव-गुणवत्ता को लाने के लिए पर्यावरणविदों ने भी काम जारी रखा और उन्होंने इस नदी में वास करने वाली देशीय प्रजातियों को फिर से प्रवाहित किया।
फिर लौटेगा नदी का "कल-कल" स्वरूप?
यमुना के गौरव को वापस लानी वाली पिछली योजनाओं की कलई स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने खोल दी है, लेकिन इसके बावजूद यमुना को बचाने वालों ने इसके "कल-कल" स्वरूप को वापस लाने की आस नहीं छोड़ी है और सरकार पर भी दबाव बनाए रखा है। आज फैन व काई से आच्छादित यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने की नई कोशिशों में दिल्ली सरकार इस नदी के समान्तर एक नहर को बनाने की योजना कर रही है, जिसमें वर्तमान में नदी में बहाए जाने वाला मैला पानी और अन्य औद्योगिक अपशिष्ट नहर में प्रवाहित किया जाएगा।
यह नहर वजीराबाद और ओखला के मध्य निर्मित की जाएगी। सरकार, ओखला के नजदीक यमुना में अतिरिक्त 125 क्युसेक पानी छोड़ने पर भी सहमत हो गई है। यह कदम केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत ने यमुना को बचाने में सक्रिय दलों के कुछ मसलों पर सहमति के बतौर लिया और लिखित आश्वासन दिया। दिल्ली के ले. गर्वनर ने यमुना रिवर फ्रंट बायोडाइवर्सिटी पार्क" के विकास के लिए मंजूरी भी दे दी है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कभी इसके लिए लंदन की टेम्स नदी के प्रारूप का अनुकरण करना चाहा था और और उनकी मदद करने के लिए लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन भी तैयार हो गए थे।
दिल्ली में पैदा होने वाली गंदगी का 58 फीसदी भाग यमुना में 22 नालों के जरिए आता है। ये सभी नाले वजीराबाद बैरेज और ओखला बैरेज के बीच में हैं। इस संदर्भ में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना के बहाव क्षेत्र में समीक्षा के योग्य दो विस्तारों को चिç±नत किया, जिसमें एक है दिल्ली में स्थित वजीराबाद से ओखला तक और दूसरा है उत्तर प्रदेश में स्थित माजावली से जुहिका तक। दिल्ली में यमुना का प्रवाह क्षेत्र महज 48 किमी का है, जो इसकी कुल लंबाई का 2त्न ही है, लेकिन इसमें एक अनुमान के तहत, दिल्ली में प्रति दिन 3500 एमएलडी गंदा पानी व 135 टन बीओडी यमुना में बहाया जाता है। यमुना दिल्ली में पल्ला ग्राम से प्रवेश करती है, जहां इसका प्रदूषण स्तर "ए" होता है, पर राजधानी के अंतिम छोर जैतपुर को छोड़ते समय यही स्तर "ई" तक पहुंच जाता है।
15 साल में सरकार ने "द यमुना एक्शन प्लान" ने 1993 से अबतक करीब 1300 करोड़ रूपए निवेश किए।
18 साल से दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने यमुना के जल को पीने योग्य बनाने के लिए 4439 करोड़ रू. खर्चे
25 साल से अधिक का समय बीच चुका है और यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए दायर जनहित की कानूनी जंग जारी है
सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इन दोनों नदियों गंगा-जमुना में घरेलू प्रवाह न बहाए जाएं
जयंती नटराजन
मंत्री, पर्यावरण मंत्रालय
सोमाद्रि शर्मा