Last updated - Fri, May 24, 2013
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काश! जीवन में होता अन-डू...
जिंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है। हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आंखों से ओझल हो जाती है। ऎसे में हम हमेशा से यही ख्वाहिश करते आए हैं कि काश हमारे पास जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई अन-डू बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्यूटर में होता है और ऎसा सोचने वाले शायद हम अकेले नहीं हैं।

यकीनन, हमारे पास बीते समय में लौटने के लिए कोई टाइम मशीन नहीं है लेकिन कुछ तो ऎसा है जिससे हम अपने जीवन को अन-डू कर सकते हैं और ऎसा करने के लिए किसी खास दिन जैसे नया साल या जन्मदिन या और किसी खास मौके की राह तकना वक्त की बर्बादी ही होगी। आज यह पल ही वह सबसे बेहतर अवसर है जब हम अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक नई शुरूआत कर सकते हैं।
हमारी मुख्य समस्या यह है कि हम अपने नए लक्ष्यों के बारे में सोचकर उत्साहित तो बहुत हो जाते हैं लेकिन उन्हें जीवन में उतारने के लिए जरूरी मेहनत नहीं करते।

ऎसे में हमें इस बात को मन में बैठाना चाहिए कि कुछ हासिल करने के लिए मेहनत करने और अनुशासित रहने से भी जरूरी यह है कि हम भली-भांति सोच-विचार कर अपने लक्ष्य बनाएं। यदि हम अपनी सामाजिक हैसियत बढ़ाने, जैसे ज्यादा पैसा कमाने या नया सामान खरीदने के लिए लक्ष्य बना रहे हैं तो शायद हमारा हौसला जल्द ही पस्त पड़ जाएगा क्योंकि हम इसे पूरे दिल से नहीं बनाते क्योंकि ये वे बातें हैं जो हम दूसरों को प्रभावित करने के लिए करना चाहते हैं।

इसलिए सबसे पहला चरण यह है कि हम अपने दिल के भीतर टटोलें और उस चीज की पहचान करें जो हमारे लिए सबसे कीमती है और फिर उसे पाने के लिए आगे बढ़ें और सोचें कम,
करें ज्यादा।

सरल-सहज जीवन जंजाल से छुटकारा
अपने आसपास फैले सामान और कबाड़ को उलटिए-पलटिए और उनकी तीन ढेरियां बनाइए, रिसाइकल, दान और उपयोग। जिन वस्तुओं को आपने बहुत समय से इस्तेमाल नहीं किया है उन्हें उनकी कंडीशन के अनुसार या तो फेंक दीजिए या किसी को दे दीजिए या बेच दीजिए। इसी तरह अपनी मेज की दराज, अलमारी, गैरेज और शेल्फ की सफाई कीजिए।

अपने मन को विस्तार दें
हम बहुत सारा समय अपने माहौल को व्यवस्थित करने में लगाते हैं लेकिन अपने उस स्पेस की अनदेखी करते हैं जिसमें हमारा सबसे ज्यादा समय बीतता है और वह है हमारा मन। अपने मन को अन-डू करने के लिए उन नकारात्मक विश्वासों से छुटकारा पाइए जो आपको कमजोर बनाते हैं। अपने मन से उन बातों को बाहर निकालिए जो आपको आगे नहीं ले जातीं। हद से ज्यादा दूसरों की परवाह मत कीजिए, अहंकार वश लिए गए संकल्पों को पूरा करने में मत जुटें।

स्वास्थ्य बेहतर स्वास्थ्य की ओर
आज और इसी वक्त से अपने खानपान की आदतों में सुधार कीजिए। यदि आपने शाकाहारी बनना या सात्विक भोजन अपनाना तय किया है तो इसे अमल में लाइए। प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैंडी वगैरह को अपने आहार से बाहर कीजिए।

मास्टर क्लींजिंग आजमाइए
दस दिनों की डीटॉक्सीफिकेशन डाइट से आपका स्वास्थ्य रीबूट होगा और आपके आहार में बदलाव आएगा। जब हमारी ऊर्जा भोजन को पचाने में खर्च नहीं होती है तो हमारा शरीर स्वयं को व्यवस्थित करने लगता है। उपवास करके देखिए और आप जान जाएंगे कि हम अपने समय का कितना बड़ा हिस्सा खाना बनाने और खाने में लगा देते हैं।

घर-परिवार-संबंध जुड़ाव और मेल-मिलाप रखिए
हमारी ज्यादातर महत्वाकांक्षाओं के केंद्र में हम ही होते हैं लेकिन इनके लिए हमें अपने संबंधों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए। अपने परिवार और बच्चों के साथ बिताए गए लम्हे कभी व्यर्थ नहीं जाते। अपने माता-पिता से और अधिक जुड़ने का प्रयास कीजिए क्योंकि उन्हें हर बीतते दिन के साथ आपकी अधिक जरूरत होती है। किसी व्यक्ति से पुराना वैर भाव हो तो आगे बढ़ उसे दूर करें।

रोमांटिक बनिए
अपने कॅरियर, नौकरी-बिजनेस और स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर बनाए गए लक्ष्यों को पूरा करने की आपाधापी में जिंदगी से रोमांस पीछे छूट जाता है। इसे जिंदगी में वापस लाना आसान है। अपने प्रियजन के साथ वक्त बिताइए, कहीं सैर पर जाइए। उनके लिए कोई उपहार खरीदिए। साथ बैठकर कॉफी पीना और फिल्म देखना भी शुरूआत के लिए कुछ बुरा नहीं है।

रूपए-पैसे, खर्चे-कमाई
अपने बैंक अकाउंट का जायजा लें: छुियों या त्योहारों के दौरान खर्चे आसमान छूने लगते हैं। जब सभी उपहारों का आदान-प्रदान कर रहे हों तो खुद को काबू में रखना मुश्किल हो जाता है। ऎसे में मॉल्स और दुकानों में बम्पर सेल और ऑफर भी बड़े लुभावने मिलते हैं लेकिन ऎसे समय पर ही अपने खर्च पर ध्यान देने की जरूरत होती है। अपने जरूरी खर्चो के लिए बचत करना, फालतू खचोंü को नियंत्रित करना और आड़े वक्त के लिए पैसे बचाकर रखना ही सबसे अच्छी नीति है।

जरूरी और गैर जरूरी खर्चे
पेन और पेपर लें। पेपर के बीच एक लाइन खींचकर दो कॉलम बनाएं। पहले कॉलम में अपने पिछले तीस दिनों के सारे गैरजरूरी खर्चे लिखें, जैसे अनावश्यक कपड़े, शॉपिंग, जंक फूड, सिनेमा, मौज-मजे में खर्च की गई रकम। हर महीने चुकाए जाने वाले जरूरी बिलों की रकम इसमें शामिल न करें। अब दूसरे कॉलम में उन चीजों के बारे में लिखें जिन्हें आप पैसे की कमी के कारण कर नहीं पा रहे हैं। शायद आप किसी वर्कशॉप या कोचिंग में जाना चाहते हों या आपको एक्सरसाइज बाइक खरीदनी हो। आप पहले कॉलम में किए गए खचोंü में कटौती करके दूसरे कॉलम में शामिल चीजों के लिए जगह बना सकते हैं।

फिटनेस : जरूरी लय बनाए रखें
आप कई तरह के फिटनेस प्रोग्राम और लक्ष्य तय कर सकते हैं। बदलते हुए वातावरण और तनावपूर्ण जीवन के कारण अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम नियमित रूप से किसी शारीरिक गतिविधि में शामिल हों। इसके लिए यह जरूरी है कि हम फिटनेस के लिए की जाने वाली गतिविधियों जैसे सुबह की सैर, जॉगिंग, योग आदि की लय को बनाए रखें। यदि हम अनुशासित रहकर अपनी गतिविधि को नियमित रूप से करेंगे तो इसका लाभ हमें तो मिलेगा ही बल्कि हमारे करीबी भी अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रेरित होंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम किसी ऎसे ग्रुप में शामिल हो जाएं जो किसी निश्चित स्थान पर रोज एकत्र होता है।

बोनस टिप
हम कई अवसरों पर खुद को पीछे कर देते हैं क्योंकि हमें कुछ पता नहीं होता या हम यह नहीं जानते कि शुरूआत कहां से करें। ऎसे में "मैं नहीं जानता या जानती" कहने के बजाय "मैं यह जानकर रहूंगा या रहूंगी" कहने की आदत डालें। यह टिप दिखने में आसान है पर बड़े करिश्मे कर सकती है। इसे अपनाकर आप बिजनेस में आगे रहने के लिए जरूरी आक्रामकता दिखा सकते हैं। आप योजनाबद्ध तरीके से अपनी किताबें छपवा सकते हैं और यदि आप ठान ही लें तो पूरी दुनिया घूमने के लिए भी निकल सकते हैं। संकल्प लें कि आप जानकारी नहीं होने को अपनी प्रगति की राह का रोड़ा नहीं बनने देंगे।

आभासी दुनिया से बाहर निकलना
ईमेल, फेसबुक, टि्वटर, चैट, मोबाइल और शेयरिंग की दुनिया में यह बहुत संभव है कि आप वास्तविक दुनिया से दूर होते जाएं। ये चीजें बुरी नहीं हैं लेकिन ये वास्तविक दुनिया में आमने-सामने घटित होने वाले संपर्क का स्थान नहीं ले सकतीं। लोगों से मेल-मिलाप रखने, उनके सुख-दुख में शरीक होने से ज्यादा कनेक्टिंग और कुछ नहीं है। आप जिस विधि से लोगों से जुड़ना चाहें, आपका लक्ष्य होना चाहिए कि आप लम्बे समय के लिए जुड़ें। दोस्तों की संख्या नहीं बल्कि उनके साथ की कीमत होती है।

इस तरह आप अपनी जिंदगी को एक नए और खुशनुमा मोड़ पर लाने के लिए अन-डू कर सकते हैं और इसके लिए सबसे अच्छा दिन है "आज" और सबसे अच्छा वक्त है "अभी"।
निशांत मिश्र
 
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